शहर में पार्क रोड स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर को माता अंजनी का टीला नाम से भी जाना जाता है। हनुमान जी की माता अंजनी को समर्पित यह टीला कैथल के मुख्य पूजनीय स्थानों में से एक माना जाता है। यह मंदिर शहर के मध्य में स्थित है। यहां हर मंगलवार को पूजा पाठ करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। समय-समय पर मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। कैथल को हनुमान का जन्मस्थान भी माना जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार कैथल का नाम पहले कपिस्थल था। इसी मंदिर और टीले के कारण जिले का नाम कैथल पड़ा था।
सतयुग में होता था विशाल टीला : मंदिर के पुजारी पंडित बाबूराम शर्मा ने बताया कि मंदिर का इतिहास सतयुग से जुड़ा है। यहां पहले एक विशाल टीला होता था। एक मान्यता के अनुसार यहां माता अंजनी का निवास था और हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस कारण इसे अंजनी का टीला कहा जाता है। कपि के राजा होने की वजह से हनुमान जी के पिता केसरी को कपिराज कहा जाता था। बाद में माता अंजनी के टीले के पास रिहायश बन गई और यह टीला विलुप्त हो गया। श्रद्धालु हर मंगलवार को मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं और हनुमान चालीसा और बजरंग बाण से हनुमान जी की स्तुति करते हैं।
मंदिर में पूजा पाठ करने से मिलता है मन वांछित फल : बाबूराम ने बताया कि यह मान्यता प्राचीन काल से ही चली आ रही है कि माता अंजनी टीला हनुमान मंदिर में पूजा पाठ करने से मन वांछित फल प्राप्त होता है। श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान से मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में पहले श्रद्धालु मेले में इकट्ठे होते थे, लेकिन अब शहर के बीच में होने के कारण संख्या ज्यादा नहीं हो पाती। वर्ष में किसी एक निश्चित दिन आने की बजाय श्रद्धालु किसी भी मंगलवार को यहां पूजा पाठ के लिए आते हैं। जिले के साथ-साथ बाहर से आने वाली धार्मिक कलाकार पार्टियों द्वारा जागरण व अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।