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एचवीपीएनएल के एसडीओ पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

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कैथल। बिजली निगम में गड़बड़झाला का मामला सामने आया है। श्री सालासर बाला जी एल एंड सी सोसायटी लिमिटेड कैथल के जितेंद्र मोहन ने हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड अधिकारियों पर करीब पांच लाख रुपये ऐंठने के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर एसडीओ ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
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ढांड रोड पर एक निजी प्रतिष्ठान पर पत्रकारों से बातचीत में जितेंद्र मोहन ने बताया कि वह निगम में पिछले कई साल से बतौर ठेकेदार कार्य कर रहा है। जून 2018 में उसने एचवीपीएनएल कैथल में कार्यरत एसडीओ निखिल गर्ग ने बिल पास करने की एवज में बिल का 10 प्रतिशत बतौर रिश्वत देने की मांग की। जब उसने यह राशि देने में असमर्थता जताई तो आरोपी अधिकारी ने उसके बिल में नाजायज तरीके से कटौती करना तथा बिल देरी से भुगतान करना शुरू कर दिया। 28 जून 2020 को उसने वेल्डिंग का कार्य शुरू किया था तो जितेंद्र मोहन को उच्चाधिकारियों से मिलकर काम के लिए विभागीय बिजली देने से साफ इनकार कर दिया।
उसने इसकी शिकायत अधीक्षक अभियंता यशपाल निरंजन तथा कार्यकारी अभियंता आकाशदीप शर्मा को भी की परंतु अधिकारियों ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। उसने अधिकारियों को चार बार पत्राचार भी किया लेकिन बात जस की तस रही। इस प्रकार से उसे मजबूरन जेनरेटर लेकर कार्य करवाना पड़ा तथा करीब 1.20 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े जबकि विभागीय नियमानुसार बिजली का भुगतान निगम की ओर से किया जाता है।
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दूसरी ओर उपमंडल अभियंता निखिल गर्ग ने बताया कि यह करीब तीन साल का पुराना मामला है। ठेकेदार जितेंद्र मोहन ने अनावश्यक रूप से हर तरीके की शिकायत की है। चार से पांच बार विजीलेंस में जांच हो चुकी है। सीएम विंडो पर भी जांच हो चुकी है लेकिन कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ है। उन पर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं।
सीएम विंडो पर शिकायत के बावजूद भी नहीं हुई कार्रवाई
जितेंद्र मोहन ने बताया कि उसने मामले की जांच के लिए सीएम विंडो पर शिकायत की। निदेशक ने मुख्य अभियंता राजेश गोयल को जांच सौंप दी जबकि वह स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर जेल की सलाखों के पीछे रह चुके हैं। उन्होंने एसडीओ निखिल गर्ग से मिलकर मामले को रफा-दफा कर दिया। सीएम विंडो शिकायत की सुनवाई के दौरान तत्कालीन नामित सदस्यों सतपाल गुप्ता और राजेंद्र नैनावाले ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की थी लेकिन इसके बावजूद पंचकूला अधिकारियों ने शिकायत को बंद कर दिया। यही नहीं इसके बाद फिर से की गई शिकायत को भी वर्तमान में मुख्य अभियंता मनोज कुमार वत्स द्वारा इसे बंद कर दिया गया।
समाधान नहीं हुआ तो शुरू करेंगे अनशन
जितेंद्र मोहन ने बताया कि वे उच्चाधिकारियों को शिकायत कर थक चुके हैं लेकिन भ्रष्टाचार में डूबे निखिल गर्ग व उसके संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने वे क्षुब्ध हैं। यदि जल्द ही इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे स्वयं गृह मंत्री अनिल विज तथा मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलेंगे। यही नहीं यदि फिर भी न्याय नहीं मिला तो वे निगम के मुख्य अभियंता पंचकूला कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे।
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