संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। गांव शिमला में करीब 40 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन में घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद पंचायत विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण सामग्री के नमूने लिए। ग्रामीणों ने विभागीय जांच पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच विजिलेंस या किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से कराने की मांग की है।
सरपंच रामचंद्र की मौजूदगी में पंचायत विभाग के एसडीओ पवन कुमार के नेतृत्व में विजय और रवीश कुमार ने निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया। टीम ने बाउंड्रीवॉल में इस्तेमाल की गई ईंटों समेत अन्य निर्माण सामग्री के नमूने लिए। ग्रामीणों का आरोप है कि चारदीवारी में दोयम दर्जे की पीली ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। इससे भवन की मजबूती को लेकर भी आशंका पैदा हो गई है। ्र
ग्रामीण रमेश कुमार, सूबे सिंह, चरण सिंह, गोल्डी मोर और वीरभान ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान कई बार अधिकारियों को घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि निर्माण कार्य पंचायत विभाग की निगरानी में हुआ है और अब उसी विभाग के अधिकारी जांच कर रहे हैं। ऐसे में जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की उच्च स्तरीय या विजिलेंस जांच कराने की मांग की।
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लैब रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
पंचायत विभाग के एसडीओ पवन कुमार ने भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार कराया जा रहा है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर ईंटों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।