फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैथल के बाबा लदाना में साधु की हत्या: विश्राम गृह में मिला शव, शरीर पर मिले चोट के निशान; 550 साल पुराना डेरा

Wed, 02 Sep 2026 12:14 PM IST
Naveen संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)

सार

मृतक महंत के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं, जिसके बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू की।
विज्ञापन
आरोपी को ले जाती पुलिस - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गांव बाबा लदाना स्थित ऐतिहासिक डेरा बाबा राजपुरी में एक साधु की हत्या का मामला सामने आया है। ग्रामीणों को बुधवार सुबह डेरे के विश्राम गृह में साधु शिव शंकर पुरी का शव पड़ा मिला। शरीर पर चोटों के निशान थे और सिर व दाढ़ी के बाल भी उखड़े हुए पाए गए। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अनुयायी और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए तथा हत्या का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मामला धार्मिक स्थल से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। सीआईए, एंटी व्हीकल थेफ्ट स्टाफ और सदर थाना पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने डेरे के मुख्य महंत दूजपुरी समेत कुछ साधुओं को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

विज्ञापन


तीन महीने पहले यूपी से आया था शिव शंकर पुरी
पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया कि मृतक साधु शिव शंकर पुरी करीब तीन महीने पहले उत्तर प्रदेश से बाबा लदाना स्थित डेरे में आया था। वह मुख्य महंत दूजपुरी के साथ डेरे में रह रहा था। बुधवार सुबह जब ग्रामीण पूजा-पाठ के लिए डेरे में पहुंचे तो शिव शंकर पुरी को विश्राम गृह में मृत पाया।
मृतक के अनुयायियों ने मुख्य महंत पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि शिव शंकर पुरी को पहले रस्सियों और जंजीरों से बांधा गया और बाद में बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसकी मौत हो गई। अनुयायियों ने दावा किया कि मारपीट के दौरान साधु के सिर और दाढ़ी के बाल भी उखाड़े गए। हालांकि, इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।

विज्ञापन

एसएचओ बोले- सिगरेट उठाने को लेकर हुआ था विवाद

सदर थाना एसएचओ कुलदीप सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में शिव शंकर पुरी और डेरे के मुख्य महंत दूजपुरी के बीच सिगरेट उठाने को लेकर विवाद होने की बात सामने आई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। मुख्य महंत सहित कुछ अन्य साधुओं से पूछताछ की जा रही है। पोस्टमार्टम और जांच के बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

550 साल पुराने डेरे का गौरवशाली इतिहास

बाबा लदाना का डेरा बाबा राजपुरी क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मान्यता है कि डेरे की स्थापना करीब 550 वर्ष पहले हुई थी। बाबा राजपुरी का जन्म 1690 में हुआ था। उन्होंने करीब आठ वर्ष की आयु में गांव बात्ता जाकर चोला धारण किया और संत सरस्वती पुरी को अपना गुरु बनाया। बाद में उन्होंने अपनी साधना और परंपरा को आगे बढ़ाया। डेरे में बाबा राजपुरी के 360 धूणे होने की भी मान्यता है। विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस के गुरु तोतापुरी को भी इस डेरे की परंपरा से जोड़ा जाता है। तोतापुरी डेरे के प्रमुख महंतों में रहे। रामकृष्ण परमहंस आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के गुरु बने।

वर्तमान में दूजपुरी हैं मुख्य महंत

डेरे की महंत परंपरा में सिद्ध पुरी, भंडार पुरी, शुद्ध पुरी, ज्ञान पुरी, तोतापुरी, चेतनपुरी और हजारी पुरी जैसे संतों के नाम शामिल हैं। वर्तमान में दूजपुरी डेरे के मुख्य महंत हैं।

चार बार होती है आरती, 31 ज्योत जगाई जाती हैं

डेरे में प्रतिदिन चार बार आरती होती है। पहली आरती सुबह चार बजे, भोग आरती दोपहर 11:30 बजे, तीसरी आरती दोपहर तीन बजे और इसके बाद शाम को संध्याकालीन आरती होती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार यहां 31 ज्योत भी जगाई जाती हैं। बाबा राजपुरी की पूजा, बात्ता डेरे का भंडारा और क्योड़क की अलख क्षेत्र में प्रसिद्ध है।

दशहरे के बाद तीन दिन लगता है विशाल मेला

डेरे में दशहरे के बाद विशाल धार्मिक मेला आयोजित होता है। चांदनी एकादशी के अवसर पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मेले के दौरान हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अंतिम दिन राज्य स्तरीय कुश्ती दंगल भी कराया जाता है, जिसमें नामी पहलवान भाग लेते हैं। श्रद्धालु यहां दूध, घी और आटा चढ़ाते हैं। मान्यता है कि दूध चढ़ाने से पशुधन में वृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है, जिसके कारण इसे दूधाधारी बाबा का डेरा भी कहा जाता है।
विज्ञापन

80 एकड़ भूमि और 135 पशुओं का डेरा

डेरे के पास करीब 80 एकड़ भूमि और लगभग 135 पशु बताए जाते हैं। डेरे में मौजूद अधिकांश पशु श्रद्धालुओं द्वारा मनोकामना पूरी होने पर दान किए गए हैं। परिसर में करीब 400 वर्ष पुराना जाल या पीलू का पेड़ भी मौजूद है, जिसे श्रद्धालु विशेष आस्था से देखते हैं। फिलहाल पुलिस हत्या के मामले में हर पहलू से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें