संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। विजिलेंस की टीम ने छात्रवृत्ति के नाम पर 45 लाख रुपये के घोटाले के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों को मंगलवार को अदालत में पेश किया। पूछताछ के लिए अदालत ने आरोपियों को दो दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया है। गिरफ्तार आरोपियों में गांव करोड़ा निवासी राजेश कुमार, गांव सिरटा निवासी धर्मवीर और सीएससी सेंटर संचालक असंध निवासी नवीन कुमार शामिल हैं।
इनके अलावा बैंक से सेवानिवृत्त आरोपी हुकमचंद की गिरफ्तारी के लिए विजिलेंस टीम दबिश शुरू कर दी है। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, लगभग 11 साल पहले आरोपियों ने कॅरिअर एजुकेशन सोसायटी बनाकर यह घोटाला किया था।
इस घोटाले में न केवल सीएससी सेंटर संचालक बल्कि एसबीआई बैंक का लेखाकार भी शामिल था, जिसने फर्जी बैंक खातों को सत्यापित करने में मदद की। आरोपियों ने जिला कल्याण विभाग की ओर से अनुसूचित जाति के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के लिए फर्जी दाखिले दिखाकर 2012-13 में यह घोटाला अंजाम दिया।
फर्जी दाखिले दिखाकर हड़पी थी राशि ः सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने 2014-15 और 2015-16 में पंजाब के विभिन्न कालेजों में कई कोर्सों में फर्जी दाखिले दिखाकर सरकारी छात्रवृत्ति की राशि हड़पी। लगभग 2000 से अधिक छात्रों के फर्जी दाखिले दिखाए गए थे। एक छात्र को सामान्यतः 30-35 हजार रुपये छात्रवृत्ति के रूप में मिलती है।
19 दिसंबर 2023 को एसीबी के इंस्पेक्टर सूबे सिंह की शिकायत पर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में बताया गया कि आरोपियों ने पंजाब के विभिन्न कालेजों में एएनएम और जीएनएम कोर्सों में फर्जी दाखिले दिखाए। चूंकि इन कोर्सों के कालेज स्थानीय स्तर पर कम हैं, इसलिए आरोपियों ने दूसरे राज्य के कालेजों में दाखिले दिखाकर छात्रवृत्ति का गलत लाभ उठाया।
रिमांड के दौरान तीनों आरोपियों
से हड़पी गई राशि की बरामदगी और घोटाले को अंजाम देने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी जुटाई जाएगी।
-महेंद्र, जिला प्रभारी- जिला एंटी करप्शन ब्यूरो