जिले की मंडियों में एक ओर जहां पीआर किस्म के धान की खरीद न होना किसानों के लिए सिरदर्दी का कारण बना हुआ है, वहीं, दूसरी ओर बारीक धान के रेट पूरे न मिलने के कारण भी किसानों को परेशानियों का सामाना करना पड़ रहा है। रोजाना किसी न किसी मंडी या खरीद केंद्र पर किसान इन दोनों समस्याओं के कारण परेशान हो रहे हैं। शहर की मंडियों में भी हालात ऐसे ही बने हुए हैं। नई और पुरानी अनाज मंडी धान की विभिन्न किस्मों की ढेरियों से अटी पड़ी हैं, लेकिन किसानों को फसल बेचने के लिए खरीदार नहीं मिल रहे। ऐसे में उन्हें मंडी में फसल लाने के बाद वहीं बैठकर कई-कई दिनों तक बिक्री का इंतजार करना पड़ रहा है। अब तक मंडी में धान की विभिन्न किस्मों की करीब 17 लाख क्विंटल की खरीद हो चुकी है, लेकिन बारीक धान अब भी करीब 50 प्रतिशत या तो मंडियों में पड़ी है, या फिर खेतों में खड़ी है। सरकार द्वारा पीआर धान की खरीद बंद कर दी गई है जिससे किसानों की परेशानियां और ज्यादा बढ़ गई हैं।
मंडी में बिक्री का इंतजार कर रहे किसान
मंडी में धान लेकर पहुंचे किसान पृथ्वी सिंह, राजपाल बालू, ऋषिपाल, कृष्ण चंद, नन्हा राम, बलवान सिंह, तेजा राम व रमेश ने बताया कि उनमें से कई किसान तो ऐसे हैं, जो तीन-चार दिन से मंडी में पीआर धान लेकर आए हुए हैं, लेकिन अब तक खरीद नहीं हुई है। उनके त्योहार भी इस बार मंडी में ही निकल गए हैं। सरकारी खरीद बंद होने के बाद अगर एकाध प्राइवेट खरीदार आता भी है तो वह भी फसल का पूरा रेट नहीं लगा रहा। सरकार ने रेट 1835 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित कर रखा है, लेकिन उनकी फसल प्राइवेट में 1650 रुपये को पार नहीं कर रही। ऐसे ही उन्हें बारीक धान के रेट भी कम मिल रहे हैं। पिछले वर्ष जो फसल 3000 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गई थी, वह अब 2400 से लेकर 2700 रुपये तक बिक रही है। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी फसल की खरीद करवाए ताकि वे आगामी सीजन में उगाई जाने वाली फसलों की तैयारियां कर सकें।
मंडी में आ चुकी है 12 लाख क्विंटल पीआर धान
कैथल की नई अनाज मंडी में अब तक पीआर किस्म के धान की 12 लाख क्विंटल तक आवक दर्ज की जा चुकी है। इसके बाद अब खरीद बंद होने के बावजूद मंडी में पीआर धान के ढेर लगे हैं। 1509 किस्म के बारीक धान की आवक तीन लाख 27 हजार क्विंटल दर्ज की जा चुकी है। ऐसे ही मंडी में मुच्छल किस्म की धान 96 हजार 200 क्विंटल आ चुकी है और 1121 किस्म की धान की आवक 53061 क्विंटल तक हुई है। बारीक धान की किस्मों में से अब तक करीब 25 प्रतिशत फसल मंडियों में पड़ी है। किसान कम रेटों में फसल देने को तैयार नहीं हैं और खरीदार रेट को ज्यादा बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।
खरीद को लेकर किसानों का प्रदर्शन भी बेअसर
पीआर की खरीद बंद होने के कारण चार दिन पहले किसानों ने मंडी में प्रदर्शन भी किया था। प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने जल्द से जल्द खरीद शुरू करवाने की मांग की थी। किसानों के प्रदर्शन के बाद भी खरीद शुरू नहीं हो पाई। इसके अलावा ढांड और राजौंद की मंडियों में भी किसान इस मांग को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं।
नहीं मिल रहे पूरे रेट
मंडी में धान लेकर पहुंचे गांव बालू निवासी किसान राजपाल ने बताया कि वह कल मंडी में बारीक धान 1121 लेकर आया था। खरीदार तो आए, लेकिन रेट सही नहीं लगा। इस कारण उसने फसल बेचने से मना कर दिया। धान सूखी हुई है, फिर भी उनकी मेहनत के अनुसार रेट नहीं मिल रहे।
प्राइवेट खरीदार दे रहे प्रति क्विंटल 1650 रुपये तक कीमत
मंडी में पीआर धान लेकर पहुंचे किसान ऋषिपाल ने बताया कि सरकारी खरीद बंद होने के बाद प्राइवेट खरीदार ही फसल खरीद रहे हैं। उसके सामने कई किसानों की फसल बिकी, लेकिन 1650 रुपये से ज्यादा किसी का रेट नहीं मिला। मजबूरी में उन्हें भी कम रेटों में ही फसल बेचनी पड़ेगी।
खरीद शुरू करवाने का कर रहे प्रयास
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक वरिंद्र सिंह ने कहा कि उनकी ओर से मंडी में पीआर धान की खरीद का कार्य करवाने के प्रयास किए जा रहे है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है। जैसे ही आदेश आते हैं, खरीद शुरू करवा दी जाएगी।