कैथल। जिला परिषद के चुनाव में उम्मीदवारों ने अपनी क्षमता के अनुसार प्रचार प्रसार में तो पूरा जोर लगाया, लेकिन कुछ उम्मीदवारों को गांवों में अपने एजेंट तक ढूंढने में परेशानी हुई। मतदान से पूर्व रात तक उम्मीदवार विभिन्न गांवों में ऐसे लोगों को ढूंढते रहे, जो मतदान केंद्र में उनका बस्ता पकड़ सकें और पोलिंग का हिसाब-किताब रख सकें।
जिन गांवों से कोई उम्मीदवार जिला परिषद या ब्लॉक समिति के चुनाव में नहीं रहा, उन गांवों के मौजिज लोगों के पास उम्मीदवारों ने मतदान की पूर्व रात को फोन कर केंद्र पर बैठाने के लिए एजेंट उपलब्ध करवाने की अपील की। सुबह जब उम्मीदवार बूथों पर पहुंचे तो उन्हें उनके बस्ते पकड़ने के लिए लोग नहीं मिले। मुश्किल से उम्मीदवारों ने अपने समर्थकों से बातचीत कर किसी को बस्ता थमाया। तब जाकर उम्मीदवारों की जान में जान आई। वहीं कई उम्मीदवार ऐसे भी रहे, जिनके न तो बूथों के बाहर चुनाव चिन्ह की जानकारी देने वाले दिखे और न ही बूथ के अंदर एजेंट ही दिखे।
उम्मीदवार बस बूथ पर पहुंच कर मतदाताओं से अपने पक्ष में वोट की अपील करते दिखाई दिए। जिला परिषद के उम्मीदवारों ने तो किसी तरह से जुगाड़ कर भी लिया, लेकिन ब्लॉक समिति के उम्मीदवारों के नाम केवल ईवीएम में ही ढूंढते दिखाई दिए। कई बूथों पर उनके नाम से बाहर मुश्किल ही कोई व्यक्ति वोट की अपील करता हुआ दिखा।
ब्लॉक समिति के चुनाव में ज्यादातर गांवों से उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई है। इसके चलते पूरे के पूरे ग्रामीणों ने अपने गांव के उम्मीदवारों को समर्थन दे दिया। भले ही दूसरे गांवों से उम्मीदवारों को नाममात्र वोट मिले, लेकिन खुद के गांव से पूरी वोट वहीं के उम्मीदवारों को मिलने की संभावनाएं हैं। ग्रामीणों ने सुबह 11 बजे से पहले ही गांव की आधे से ज्यादा वोट अपने गांव के उम्मीदवार के नाम डलवा दी। संबंधित उम्मीदवार के पक्ष में वोटिंग करवाने के लिए घर-घर जाकर भी महिलाओं और बुजुर्गों को मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डालने के लिए कहा गया।