संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सोमवती अमावस्या पर प्राचीन एवं ऐतिहासिक महातीर्थ फल्गु पर प्रदेश व देशभर से श्रद्धालुओं ने तीर्थ में स्नान कर अपने पितरों की आत्मिक शांति हेतु पिंडदान एवं दर्पण करवाया।
सोमवती अमावस्या के उपलक्ष्य में फल्गु तीर्थ पर खिलौनों व मिठाइयों की दुकानों पर भी रौनक दिखी। फल्गु तीर्थ में स्नान व अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए पिंडदान के उपरांत श्रद्धालुओं ने फल्गु ऋषि के मंदिर में दर्शन कर परिक्रमा भी की।
दृषद्वति नदी के किनारे फल्गु तीर्थ में स्नान करके देवता, ऋषि और पित्तरों का तर्पण करने से मनुष्य को अग्रिष्टोम और अतिरात्र जैसे यज्ञों का फल मिलता है। मान्यता है कि यहां पर पिंडदान व तर्पण करवाने से स्वयं का कल्याण भी होता है।
ऐतिहासिक एवं प्राचीन तीर्थ फल्गु तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। श्रद्धालु राजकुमार पिजौंर, रोहतास बधौली, अरविंद पंचकुला, सुधीर डेराबसी, विरेंद्र करनाल, निर्मला पंचकुला, रिंकू रायपुर रानी व धर्मबीर यूपी ने बताया कि तीर्थ पर जाने वाली सड़क जो कि महाराणा प्रताप चौक से फल्गु तीर्थ तक बुरी तरह से टूटी हुई है। सड़क पर बने गड्ढों में गंदा पानी भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि तीर्थ की इतनी महत्ता के बावजूद तीर्थ व तीर्थ तक आने वाली मुख्य सड़क की अनदेखी समझ से परे है। महर्षि फल्गु तीर्थ सेवा ट्रस्ट लगभग सात वर्ष तक प्रशासन व शासन की अनदेखी के बाद समिति सदस्यों ने तीर्थ की देखरेख करनी शुरू की थी। इस वजह से आज श्रद्धालु तीर्थ में स्नान कर पाए वरना प्रशासन के भरोसे तो श्रद्धालुओं को बिना स्नान ही
लौटना पड़ता।
गया जैसी है मान्यता
मान्यता के अनुसार पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का सहज और सरल मार्ग है। मनुष्य पर देव ऋण, गुरु ऋण अौर पितृ ऋण होते हैं। माता-पिता की सेवा करके मरणोपरांत पितृपक्ष में पूर्ण श्रद्धा से श्राद्ध करने पर पितृऋण से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि भगवान राम और सीताजी ने भी राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए बिहार के गया में पिंडदान किया था। इसी की तरह फल्गु तीर्थ की भी महत्ता कही जाती है। इसी से यहां पर आसपास के जिलों से भी तमाम लोग तर्पण के लिए पहुंचते हैं।
मान्यता है कि कभी यहां पर फल्गु नदी बहती थी। अब पांच सरोवर पर पिंडदान करते हैं। गया की तरह इसकी भी ख्याती है। यहां देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। महाभारत कालीन इस तीर्थ के बारे में भी कहा जाता है युधिष्ठिर ने यहां पर पिंडदान किया था। भीष्म के परामर्श के बाद वह यहां आए थे। युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से आग्रह किया कि वह उन्हें गृहस्थ लोगों के लिए अपनाए जाने वाले श्रेष्ठ धर्म की जानकारी दें। इस पर भीष्म ने उन्हें पवित्र कुरुक्षेत्र तीर्थ से 14 कोस की दूरी पर स्थित फल्कीवन में स्थित फल्गु तीर्थ का परिचय दिया था।
और परामर्श दिया कि फल्गु तीर्थ में आश्विन मास की सोमवती अमावस्या के दिन पिंडदान करने से उनके पितरों को मोक्ष प्राप्त होगा और तदोपरांत वह शांति एवं संतोष से राज्य सुख भोग सकेंगे।