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स्वदेशी जीवनशैली अपनाना ही आत्मनिर्भर भारत का मूल मंत्र : डॉ. अंकेश्वर प्रकाश

Tue, 11 Nov 2025 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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स्वदेशी संकल्प दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद सदस्य।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। डॉ. बीआर आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय, कैथल और स्वदेशी जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में स्वदेशी संकल्प दिवस मनाया गया। बतौर मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने अपने संबोधन में कहा कि स्वदेशी जीवनशैली अपनाना ही आत्मनिर्भर भारत का मूल मंत्र है।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में प्रवेश मोर (पंजाब नेशनल बैंक) और बलदेव आर्य (उपनिदेशक, एमएसएमई) उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित अवधारणा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के आत्मसम्मान, समाज के उत्थान, पर्यावरण संतुलन, आवश्यकतानुसार उपभोग और पारिवारिक संरचना की जीवनशैली का प्रतीक है।
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डॉ. प्रकाश ने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल नौकरियों पर निर्भर न रहें, बल्कि छोटे-छोटे स्टार्टअप्स और उद्योग शुरू करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्टार्टअप इंडिया’ अभियान से प्रेरित होकर बीते दशक में लाखों युवाओं ने आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और आर्थिक व सामाजिक प्रगति हासिल की है।

स्वदेशी जागरण मंच के जिला संयोजक डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि यह आयोजन मंच के संस्थापक श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी की 105वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वदेशी विचार और स्वावलंबन की भावना का विकास करना है।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ. रोजी गुप्ता ने किया जबकि मंच संचालन डॉ. अभिषेक गोयल ने किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए जरूरत स्वदेशी आधारित ऐसी अर्थव्यवस्था का निर्माण करना होगा, जिसमें नौकरी की जगह स्वरोजगार को प्राथमिकता मिले। हमारे गांव कैसे आत्मनिर्भर बने, इसकी रूपरेखा तैयार करनी होगी।



इस अवसर पर आमंत्रित अतिथियों प्रवेश मोर और बलदेव आर्य ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए सरकारी योजनाओं और आर्थिक सहूलियतों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छात्र कैसे सरल प्रक्रियाओं के माध्यम से अपने लघु उद्योग या स्टार्टअप्स शुरू कर सकते हैं।
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अंत में वक्ताओं ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए स्वदेशी आधारित अर्थव्यवस्था ही सशक्त मार्ग है, ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें नौकरी के बजाय स्वरोजगार को प्राथमिकता मिले और गांव आत्मनिर्भरता के केंद्र बनें। इस अवसर पर महाविद्यालय के स्टाफ सदस्य प्रो. जसपाल, डॉ. कृतिका, डॉ. मोनिका जाखड़, डॉ. राकेश, डॉ. हंसराज, प्रो. अनुराधा और प्रो. अनु उपस्थित रहीं।
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