जानकारी के अनुसार शहर में दर्जनभर नई अवैध कॉलोनियों काटी जा रही है। जहां पर हाईवोल्टेज बिजली तार की लाइनें निकली हुई है। लोगों के करंट लगने का खतरा रहता है। मकान व दुकानों के नीचे बिजली लाइन होने से हादसों की संभावना रहती है, ऐसे काफी मामले सामने आते हैं। अगर किसी ने जान बूझकर तारों के नीचे मकान बनाया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। कर्मचारियों को भी इस संबंध में सख्त आदेश दिए गए हैं कि ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
विदित रहे कि निगम की ओर से एक साल पहले अधिकारियों को फील्ड में भेजकर सर्वे करवाया गया था। उस दौरान निगम के पास 306 साइट ऐसी आई थी, जो डेंजर लाइन के नीचे थी। उनमें से 122 ऐसी थी, जो सार्वजनिक स्थानों के ऊपर से थी। सार्वजनिक स्थानों के ऊपर वाली 121 लाइनों को निगम ने हटा दिया। अब 184 मामले ऐसे थे, जो निजी व्यक्तियों के थे। वहां पर लाइनें पहले से थी और उपभोक्ताओं ने उनके नीचे घर बनाए हुए हैं। वहां प्लास्टिक की तारों को डाला जा रहा है। संवाद
बॉक्स-
छह से अधिक लोग आ चुके हैं करंट की चपेट में
पिछले कुछ वर्षों में आधा दर्जन लोग चपेट में आ चुके हैं। इनमें चंदाना गेट पर एक किशोर की मौत हुई थी। इसके अलावा फ्रेंड्स कालोनी में भी तार की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। दो पत्रकार बिजली की लाइन की चपेट में आने से मौत का शिकार हो गए थे। गांव कैलरम में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। दुकानदारों बहादुर, विनय सहित अन्य ने बताया कि यह निगम का अच्छा फैसला है। वहीं उन्होंने मांग की है कि जहां पर पुराने मकान बने हुए है। वहां से भी तार हटवाई जाए, ताकि लोग हादसों से बच सकें। मुख्य जगह पर बिजली विभाग को चाहिए कि इन तारों को शिफ्ट करे या यहां प्लास्टिक कवर की हुई तार डाली जाएं।
वर्जन-
संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी : एसई सोमवीर
बिजली निगम के एसई सोमवीर भालोठिया ने कहा कि हाइवोल्टेज तारों के नीचे मकान बनाना अपराध की श्रेणी में आता है। अगर तार के नीचे नया मकान बनाना पड़े, तो पहले निगम के अधिकारियों को सूचना दें। अपने खर्च पर पहले उसे हटवाएं। अगर इस प्रकार मकान या दुकानें बनाई तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिसका खामियाजा उपभोक्ता को भुगतना पड़ेगा।