संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला परिषद कैथल में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। एसीबी ने करीब डेढ़ साल से फरार चल रहे आरोपी ठेकेदार और भाजपा नेता प्रवीन सरदाना को बुधवार को गिरफ्तार किया। हालांकि, आरोपी की ओर से बीमारी का हवाला देने पर अदालत ने उन्हें अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी।
यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. नंदिता कौशिक की अदालत ने सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को जमानत की अवधि में जांच में पूरा सहयोग करना होगा।
इस घोटाले में तत्कालीन जिला परिषद सीईओ, एसडीओ, जेई समेत कई ठेकेदारों के नाम सामने आए थे। आरोप है कि 35 से 40 प्रतिशत कमीशन लेकर ठेकेदारों को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। मशीनरी किराये पर दिखाकर अलग-अलग खातों में भारी भरकम राशि ट्रांसफर की गई।
प्रवीन सरदाना की फर्म भारत प्रोजेक्ट के खाते में भी 1.43 करोड़ रुपये आने का उल्लेख है। हालांकि, बचाव पक्ष का कहना है कि उन्होंने केवल मशीनरी व ट्रैक्टर-ट्रॉली उपलब्ध कराई थी और सभी भुगतान विभागीय अधिकारियों की अनुमति से हुए।
एसीबी के तर्क ः एसीबी ने अदालत में कहा कि सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है। केवल 30 प्रतिशत कार्य हुआ, लेकिन भुगतान पूरा का पूरा कर दिया गया। ऐसे में आरोपी से पूछताछ और वसूली के लिए हिरासत जरूरी है।
बचाव पक्ष की दलील ः वहीं, बचाव पक्ष ने दावा किया कि प्रवीन सरदाना को राजनीतिक दबाव में फंसाया गया है। वे गंभीर हृदय रोग से पीड़ित हैं और पहले भी ऑपरेशन करवा चुके हैं। सभी जरूरी दस्तावेज, बिल और कर विवरणी पहले ही जांच एजेंसी को सौंपे जा चुके हैं।
अदालत का आदेश ःअदालत ने माना कि कई सह-अभियुक्तों को पहले ही हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। सभी बिल विभागीय जांच के बाद ही पास हुए थे। इसलिए आरोपी को गिरफ्तारी की स्थिति में एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के जमानती बंधन पर अंतरिम अग्रिम जमानत दी जाती है।
अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी नियमित रूप से जांच अधिकारी के समक्ष पेश होकर सहयोग करेंगे। अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।
31.64 करोड़ की ग्रांट, 7.15 करोड़ की गड़बड़ी
वर्ष 2020-21 में जिला परिषद कैथल को पूंजीगत परिसंपत्तियों और स्वच्छता परियोजनाओं के लिए 31.64 करोड़ रुपये की राशि दी गई थी। इनमें गोबर-धन प्रोजेक्ट, ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन, तालाब प्रणाली और नालों की सफाई जैसी योजनाएं शामिल थीं।
एसीबी जांच के अनुसार अधिकारियों व ठेकेदारों ने मिलीभगत से फर्जी मस्टर रोल, नकली बिल और वाउचर तैयार कर केवल 30 प्रतिशत कार्य करवाया, जबकि 100 प्रतिशत काम पूरा दिखाकर 7.15 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी की गई।
प्रवीन सरदाना 16वां आरोपी है। आरोपी ने अदालत में बीमारी का हवाला दिया, जिसके बाद उसे अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी गई। अदालत ने आरोपी को एसीबी जांच में शामिल होकर सहयोग करने के आदेश दिए हैं। -महेंद्र सिंह, जांच अधिकारी,-एसीबी कैथल