कैथल। जिला परिषद के माध्यम से गांवों में सफाई के लिए आई 10 करोड़ रुपये की ग्रांट को लेकर जिला परिषद के रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी। एसीबी की ओर से सात आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ के बाद यह फैसला लिया गया है। अब तक की जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि आरोपियों ने घोटाले की रकम से प्लॉट खरीदे हैं। ऐसे में राजस्व विभाग से भी रिकार्ड तलब किया गया है।
विदित हो कि सफाई घोटाले का मास्टरमाइंड कैथल में डिप्टी सीईओ रहे जसविंद्र को बताया जा रहा है। ऐसे में डिप्टी सीईओ रहे जसविंद्र सिंह के कार्यकाल में हुए अन्य विकास कार्याें को लेकर भी एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से जांच की जाएगी। इससे पहले मामले में गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों को शुक्रवार को ही 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
दरअसल, वर्ष 2021 की जनवरी में कोरोना महामारी से बचाव के लिए सरकार ने गांवों में सफाई व्यवस्था को 10.16 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की थी। उस समय पंचायत चुनाव के नजदीक होने के चलते जिला परिषद में प्रशासक की तैनाती थी। इसी समय में 10.16 करोड़ रुपये में करीब सात करोड़ रुपये का गबन 15 आरोपियों ने मिलकर किया था। अब एंटी करप्शन ब्यूरो ने सभी दस्तावेजों को एकत्रित करते हुए जांच व कार्रवाई शुरू की है। माना जा रहा है कि 10 करोड़ रुपये की राशि में महज 30 प्रतिशत तक के ही कार्य करवाए गए थे। अब तक एसीबी की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने 151 पंचायतों के प्रत्येक गांव में नौ लाख 9999 हजार रुपये तक के फर्जी बिल बनाए थे। इसमें राजौंद खंड के छोटे से गांव फरियाबाद में आरोपी अधिकारी व ठेकेदार ने मिलकर मिट्टी के 1300 डंपर, 180 जेसीबी और एक हजार ट्रैक्टर-ट्रालियों से फर्जी काम दिखाया है, जबकि यहां की आबादी ही महज 800 ग्रामीणों की है।
गांवों में सफाई के लिए आई 10 करोड़ रुपये की ग्रांट को लेकर जिला परिषद के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। डिप्टी सीईओ रहे जसविंद्र सिंह की ओर से अन्य विकास कार्याें में भी गबन की आशंका है। ऐसे में सोमवार के बाद जिला परिषद की सीईओ से पत्राचार कर डिप्टी सीईओ रहे जसविंद्र सिंह के कार्यकाल में हुए अन्य विकास कार्याें को लेकर भी जानकारी प्राप्त की जाएगी।
- महेंद्र सिंह, प्रभारी, एसीबी, कैथल।
घोटाले में शामिल भाजपा नेता समेत आठ आरोपियों की तलाश में दी जा रही दबिश
कैथल। जिला परिषद में गांवों में सफाई के लिए आई करोड़ों रुपये की राशि गबन के मामले में अब एसीबी ने जांच तेज कर दी है। साथ ही भाजपा नेता समेत आठ आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। वहीं एसीबी की टीम अब गबन की गई राशि की रिकवरी और उससे खरीदी गई संपत्ति की पड़ताल में जुटी है। विदित हो कि घोटाले में 15 आरोपियों की संलिप्तता बताई जा रही है, जिसमें सात की गिरफ्तारी हुई है। धरे गए आरोपियों में शामिल एक्सईएन नवीन ने जींद में गबन की रकम से एक प्लाट भी खरीदा है।
गौरतलब है कि एसीबी ने अब तक कैथल में पंचायती राज के एसडीओ रहे रोहतक के एक्सईएन नवीन, कैथल में पंचायती राज के जेई जसबीर सिंह, अकाउंटेंट कुलवंत के साथ पंचायती राज के ठेकेदार गांव फरियाबाद निवासी दिलबाग सिंह, गांव फतेहपुर निवासी अभय संधू, ठेकेदार राजेश और पूंडरी निवासी अनिल को गिरफ्तार किया है। मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, जेई जयवीर और साहिल तथा ठेकेदार भाजपा नेता प्रवीन सरदाना, रोहताश, कमल, प्रवीन, तिलक राज व सुमित को भी आरोपी बनाया गया है। इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। कैथल में एंटी करप्शन ब्यूरो के प्रभारी महेंद्र सिंह का कहना है कि जो आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं, उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने गबन की गई राशि से प्लॉट खरीदे हैं व घरेलू कार्याें में खर्च किया है। मामले में फिलहाल गहनता से जांच जारी है।
भाजपा नेता ने सोशल मीडिया पर आरोपों को बताया निराधार
जिला परिषद सफाई घोटाले में नाम आने के बाद भाजपा नेता प्रवीन सरदाना ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। सोशल मीडिया पर भाजपा नेता ने पोस्ट कर लिखा है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। इस घोटाले में यदि वे किसी भी प्रकार से शामिल होंगे तो हर प्रकार की सजा के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मैंने अपने राजनीतिक करिअर में कभी कोई गलत कार्य नहीं किया। मैं सरकार का पैसा किसी भी स्थिति में व्यक्तिगत इस्तेमाल करने के बारे में सोच भी नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि वह जल्द ही सभी के समक्ष तथ्य प्रस्तुत करेंगे जिससे साबित हो जाएगा कि घोटाले से उनका कोई लेना-देना नहीं है।