संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जाखौली के प्रांगण में शनिवार को मोबाइल की बढ़ती लत पर आधारित एक अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायक नाटक का मंचन किया गया। यह प्रस्तुति केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन का आईना बनकर सामने आई।
नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार एक होनहार छात्र धीरे-धीरे मोबाइल की आभासी दुनिया में खो जाता है। शुरुआत में खेल का मैदान छूटता है, फिर मित्रों से दूरी बढ़ती है और अंततः किताबें अलमारी में बंद हो जाती हैं। मां की पुकार अनसुनी रह जाती है और पिता की मेहनत अनदेखी। “बस पांच मिनट” कहते-कहते घंटे बीत जाते हैं और समय हाथ से फिसल जाता है।
नाटक का सबसे भावुक क्षण तब आया जब परीक्षा परिणाम घोषित होते हैं और छात्र को अपेक्षा से कम अंक मिलते हैं। उस समय उसे अपनी गलती का एहसास होता है और यह समझ आता है कि उसके कमजोर परिणाम से ज्यादा पीड़ा उसके माता-पिता की टूटी उम्मीदों में छिपी है। इस दृश्य ने सभा में उपस्थित अनेक विद्यार्थियों को भावुक कर दिया और कई की आंखें नम हो गईं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ओमप्रकाश शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मोबाइल एक साधन है, लक्ष्य नहीं। यदि विद्यार्थी समय रहते स्वयं को नियंत्रित कर लें, तो यही मोबाइल सफलता की सीढ़ी बन सकता है, अन्यथा यही उनके भविष्य की राह में सबसे बड़ी बाधा सिद्ध हो सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को माता-पिता के त्याग, उनके सपनों और समय के महत्व को समझते हुए अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे मोबाइल का सीमित और सकारात्मक उपयोग करेंगे, पढ़ाई को प्राथमिकता देंगे और ऐसे कार्य करेंगे जिससे उनके माता-पिता व विद्यालय का नाम गर्व से ऊंचा हो।