संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए राहत भरी खबर है। निजी अस्पतालों द्वारा आयुष्मान भारत योजना के तहत सर्जरी सेवाएं बंद किए जाने के बाद अब नागरिक अस्पताल कैथल में 24 घंटे सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन ने पांच विशेषज्ञ सर्जनों की एक विशेष टीम गठित की है, जो दिन-रात तैनात रहेगी।
हालांकि आपातकालीन परिस्थितियों में पहले भी रात के समय ऑपरेशन किए जाते रहे हैं, लेकिन अब सामान्य और नियोजित सर्जरी भी चौबीसों घंटे की जा सकेंगी। निजी अस्पतालों में आयुष्मान सेवाएं ठप होने के बाद नागरिक अस्पताल पर मरीजों का दबाव जरूर बढ़ा है, लेकिन फिलहाल किसी प्रकार की वेटिंग की स्थिति नहीं बनी है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार पहले रोजाना औसतन 6 से 7 ऑपरेशन किए जा रहे थे, जबकि सुविधा विस्तार के पहले ही दिन वीरवार को 10 सफल सर्जरी की गईं। इनमें सात सिजेरियन डिलीवरी, दो ऑर्थोपेडिक और एक ईएनटी विभाग का ऑपरेशन शामिल है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अब किसी भी आयुष्मान कार्ड धारक
मरीज को सर्जरी के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा और न ही तारीखों के लिए भटकना होगा।
निजी अस्पतालों का भुगतान अटकने से बढ़ी समस्या : निजी अस्पतालों की ओर से सरकार के बकाया भुगतान न मिलने और कुछ सर्जरी प्रक्रियाओं को पैनल से बाहर किए जाने के कारण आयुष्मान भारत योजना के तहत ऑपरेशन सेवाएं बाधित हो गई थीं। इसका सबसे अधिक असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ा, जिनकी सर्जरी अधर में लटक गई। स्थिति को
देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिक अस्पताल में संसाधन बढ़ाते हुए ऑपरेशन थिएटर को 24 घंटे सक्रिय रखने का निर्णय लिया। इस संबंध में सरकार की ओर से भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।
विशेषज्ञ डॉक्टर शिफ्टों में तैनात
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पांच विशेषज्ञ सर्जनों की टीम को अलग-अलग शिफ्टों में तैनात किया गया है।
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रात के समय भी इमरजेंसी के साथ-साथ आवश्यक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
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आयुष्मान कार्ड धारकों को दवाइयों से लेकर ऑपरेशन तक सभी सुविधाएं पूरी तरह निशुल्क दी जा रही हैं।
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ऑपरेशन के बाद मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए वार्डों में बेड की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
नागरिक अस्पताल में मरीजों को 24 घंटे निशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सर्जनों की टीम लगातार तैनात है। वीरवार को 10 ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए हैं। मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। -डा. रेनू चावला,सिविल सर्जन