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Kaithal News: शोभायात्रा निकाल भगवान श्री कपिल मुनि की प्रतिमा स्थापित

Sun, 23 Nov 2025 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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कलायत। कलायत नगर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान श्री कपिल मुनि राजकीय महिला कॉलेज परिसर में भगवान श्री कपिल मुनि की भव्य मूर्ति स्थापना की गई। मूर्ति की स्थापना श्री कपिल मुनि शिक्षा समिति की ओ से करवाई गई। श्री कपिल मुनि शिक्षा समिति 17 वर्ष तक चैरिटी की तौर पर इस महिला कॉलेज को चला कर इसे सरकार को सौंप चुकी है। उसके बाद अब भगवान कपिल मुनि के नाम से चल रहे इस शिक्षण संस्थान में शिक्षा समिति की ओ से मूर्ति स्थापना का भव्य आयोजन किया गया।
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मूर्ति स्थापना अवसर पर कॉलेज प्रशासन, शिक्षकों, छात्राओं तथा शिक्षा समिति सदस्यों ने शामिल होकर पूर्णाहुति डाली। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनसमूह ने इसे कॉलेज और क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। श्री कपिल मुनि शिक्षा समिति के सदस्यों का कहना था कि भगवान कपिल मुनि जी की मूर्ति स्थापित होने से परिसर में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण का सृजन होगा। इससे छात्राओं को भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और नैतिक मूल्यों को समझने तथा अपनाने की प्रेरणा भी मिलेगी।
काॅलेज प्रधानाचार्य डाॅ. सुनील गर्ग ने कहा कि भगवान विष्णु के पांचवें इस अवतार का उद्देश्य कर्मकांड से परे ज्ञान मार्ग को स्थापित करना था। जिससे लोग ज्ञान, त्याग, तपस्या और समाधि के माध्यम से ईश्वर को प्राप्त कर सकें। महिला कालेज का नाम भगवान कपिल के नाम पर ही है। इसलिए यह और भी जरूरी हो गया था कि ज्ञान के वाहक भगवान के इस अवतार की ज्ञान के संस्थान इस महिला कालेज में मौजूदगी हो। श्री कपिल मुनि शिक्षा समिति का यह फैसला आने वाली पीढिय़ों को सांस्कृतिक रूप से मजबूत और मूल्यवान दिशा प्रदान करेगा। श्री कपिल मुनि शिक्षा समिति के प्रधान सुरेश राणा ने कहा कि सरकार को यह संस्थान सौंपने के बाद समिति सदस्यों का सुझाव था कि भगवान कपिल की मूर्ति की कालेज परिसर में स्थापना की जाए।
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उपनिषदों में ज्ञान कर्म से ऊपर
समिति के महासचिव निशीकांत शर्मा ने कहा कि विष्णु के पांचवें अवतार भगवान कपिल का अवतार ज्ञानमार्ग को प्रतिपादित करने के लिए हुआ था। उन्होंने सांख्य शास्त्र की रचना कर ज्ञान के मार्ग को सुनिश्चित किया। कलायत की धरा पर ही उन्होंने मां देवहुति को सांख्य का तत्व ज्ञान देकर अपवर्ग की प्राप्ति बताई थी। ज्ञानकाण्ड को ही सबसे महत्व देना सांख्य की सबसे बड़ी विशेषता है। उपनिषदों में ज्ञान को कर्म से ऊपर यानी श्रेष्ठ माना गया है।
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