संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला पशुपालन विभाग की तरफ से मुंह-खुर व गलघोंटू रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। विभाग ने मुंह-खुर व गलघोंटू दोनों रोग के लिए साझी वैक्सीन तैयार की है। इस अभियान के तहत एक लाख से ज्यादा पशुओं को यह वैक्सीन लगाई जा चुकी है जबकि 95 हजार से ज्यादा पशुओं को इसे लगाया जाना बाकी है।
गौरतलब है कि पशुओं के इन मुंह-खुर व गलघोंटू बीमारियों से बचाने के लिए पशु चिकित्सक पशुपालकों के घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण कर रहे हैं। इसके तहत पशुपालकों को पशुओं में बीमारी की रोकथाम को लेकर टीकाकरण के बारे में जानकारी दी जा रही है। इस टीकाकरण से पशुओं को होने वाले फायदे के बारे में भी बताया जाता है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अब तक जिले में एक लाख 18 हजार 140 पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। दो लाख 13 हजार 972 डोज पशुओं को लगाने के लिए विभाग के पास पहुंची हैं। इस अभियान के तहत गाय व भैंस को यह टीक लगाएं जाएंगे। टीकाकरण अभियान में चार महीने से छोटे बछड़े-बछड़ी व कटड़े-कटड़ी तथा सात महीने से ज्यादा गर्भवती गायों और भैंसों को छोड़कर सभी गाय एवं भैंसों आदि की प्रजाति के पशुओं को टीकाकरण में शामिल किया गया है।
पशुपालन विभाग की टीम द्वारा टीकाकरण के दौरान पशुपालकों को पशु पालन से संबंधित योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि पशु पालकों को जागरूक किया जा रहा है कि टीकाकरण से पशुओं को बीमारियों से बचाया जा सकता है। ऐसे में पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर चलाए जाने वाले अभियान के तहत पशुओं का टीकाकरण अवश्य करवाएं।
रोग के लक्षण ः इस रोग से ग्रस्त पशु को तेज बुखार हो जाता है। बुखार की चपेट में आने से रोगी पशु सुस्त रहता है। खाना-पीना छोड़ देता है। आंखें भी लाल रहने लगती हैं। उसे सांस लेने में भी दिक्कत होती है। उसके मुंह से लार गिरने लगती है। नाक से स्राव बहना तथा गर्दन व छाती पर दर्द आदि हो जाता है।
मुंह-खुर व गलघोटू बीमारी की रोकथाम को लेकर विभाग की तरफ से टीकाकरण अभियान चलाया हुआ है। इसके तहत अब तक एक लाख से ज्यादा पशुओं को टीके लगाए जा चुके हैं। सात माह से ज्यादा की गर्भवती गाय व भैंस को यह टीका नहीं लगेगा। पशुपालकों को भी बीमारी से कैसे अपने पशुओं का बचाव करें, इसके लक्षण, बचाव व सावधानियों के बारे में बताया जा रहा है। -डॉ ओमप्रकाश, डिप्टी डायरेक्टर,
पशुपालन विभाग