फागण महीना मस्ती का, जोहड़ भरया म्हारी बस्ती का, मत ना रोकै फाग आज मनै खेलण दें
साहित्य सभा द्वारा आरकेएसडी कॉलेज के हॉल में मासिक गोष्ठी आयोजित
फोटो नंबर-05
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। साहित्य सभा द्वारा रविवार को आरकेएसडी कॉलेज के हॉल में मासिक गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता हरेश झंडई व मंच संचालन रिसाल जांगड़ा ने किया। गोष्ठी में कवियों ने कविताओं के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों सहित अन्य मुद्दों पर अपनी रचनाओं को साहित्यकारों के समक्ष प्रस्तुत किया।
गोष्ठी की शुरुआत रविंद्र कुमार की गजल से हुई। जिसमें कहा गया मंजिलें अपनी जगह हैं, रास्ते अपनी जगह हैं, पांव हैं अपनी जगह तो हौसले भी अपनी जगह हैं, आज के दौर में यह बात पल्लु बांध ले, दोस्ती अपनी जगह है, फासले अपनी जगह हैं। ईश्चर गर्ग ने, मेरी किताबें जीस्त को जिस शख्स ने पढ़ा, बरके हसीन जो भी थे सब फाड़ ले गए। सतबीर जागलान ने देखिए, जो माणस घणा बेईमान कदे ना वो सुखी रहे, बेईमान माणस में बेईमाना सारी उम्र दुखी करै। कर्मचंद केसरी की हरियाणवीं गजल में कहा, देखया इसा कमाल कसम तै, राजा बणग्या कंगाल कसम तै। सतपाल शास्त्री ने दुनिया के बदलते रंग ढंग के बारे में कविता प्रस्तुत करते हुए कहा, दुनिया का रंग डाल बिगड़ग्या, चाल बिगडग़ी, हाल बिगड़ग्या, तेरा खोट नहीं मछवारे, कुछ मछली कुछ जल बिगड़ग्या। भारती ने, न भगवा न खादी टोपी, भूख लगी है लाओ रोटी, नर पिशाच से हुए थे नेता, देश की खाते बोटी-बोटी।
डॉ. चतुर भुज बंसल ने कविता में शराबी की पत्नी की व्यथा को बयां करते हुए कहा, मेरे फूट गए सै भाग राम की सौं, इस घर कै लागो आग राम की सौं। मधु गोयल ने अभिनंदन को समर्पित कविता में कहा, जरूरी काम करने को दिल करता है, जिंदगी तेरे नाम करने को दिल करता है। डॉ. अशोक ने होली के त्योहार को देवर-भाभी के रिश्ते में बयां करते हुए कहा, होली का त्योहार आ गया, भाभी तेरी याद दिला गया। सोहन लाल सोनी ने भी इस फाग की मस्ती को आगे बढ़ाते हुए कहा, फागण महीना मस्ती का, जोहड़ भरया म्हारी बस्ती का, मत ना रोकै फाग आज मनै खेलण दे। महेंद्रपाल ने अर्जुन को दिए गए उपदेश को कविता में प्रस्तुत करते हुए कहा, तत्व का बोध हो जानै पै हो आप्पे का आभास अर्जुन, पड़दा उठ गया भ्रांति का होया ज्ञान प्रकाश अर्जुन। दुश्मन को ललकारते हुए श्योम सुदंर गौड़ ने कहा कि, जंग चाहता है जंग लड़ेंगे, गीदड़ भभकी से नहीं डरेंगे, खुन का बदला खुन से लेंगे, कब और कैसे हम तय करेंगे। स्वच्छता का संदेश देते हुए दिलबाग सिंह ने कहा, करो रै भाई सारे सफाई करो। प्रीतम शर्मा ने भी शादी पर अपने कविता प्रस्तुत की। रिसाल जांगड़ा ने महिला सशक्तीकरण पर कहा कि, नारी बाहर निकल रही है, घर की चार दिवारी सै, पहचान रही है अपनी शक्ति पूरी होशियारी सै। इस तरह से स्वामी कृष्णानंद, डॉ. हरेश झंडई, कमलेश शर्मा व रामफल गौड़ ने अपनी कविताएं प्रस्तुत की।