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आठवीं तक अपग्रेड कर दिया कागजों में स्कूल, भवन पूरा नहीं

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फोटो नंबर-1 से 3
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आठवीं तक अपग्रेड कर दिया कागजों में स्कूल, भवन पूरा नहीं
सात कमरों में छठी तक कक्षा के विद्यार्थियों की लग रही हैं कक्षाएं
बैगलेस स्कूल बनाने का किया था ऐलान, अभी तक नहीं मिलीं पुस्तकें
छठी कक्षा में महज एक अध्यापक, वह भी डेपुटेशन पर भेजा
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। गांव देवीगढ़ स्थित अपग्रेड हुआ राजकीय प्राइमरी स्कूल का अपग्रेडेशन अभी तक कागजों में ही सीमित है। स्कूल को पिछले साल सरकार ने अपग्रेड करने के बाद इसे मिडिल कक्षा तक घोषित किया, लेकिन नौ महीने बाद भी स्कूल में कक्षा छठी के अध्यापकों को पूरा प्रबंध नहीं हो सका है। इस कारण से छठी कक्षा में बच्चों की संख्या भी न के बराबर है। वहीं इस स्कूल में केवल दस कमरे ही बने हैं। इसमें से तीन कमरों को स्कूल के कार्यालय व अन्य कार्य के लिए इस्तेमाल में लाया गया है। इसमें से एक कमरे में गांव की ओर से आंगनबाड़ी का बनाया गया है। वहीं अन्य सात कमरों में इन कक्षा के बच्चों को पढ़ाने का कार्य किया जाता है।

सितंबर 2017 में अपग्रेड, टीचर नौ महीने बाद केवल एक
गांव देवीगढ़ का राजकीय वर्ष 2017 की सितंबर में ही सरकार ने अपग्रेड कर दिया था, लेकिन नौ बाद भी छठी कक्षा में न तो बच्चे हैं और न ही कोई अध्यापक। स्कूल प्रशासन के मुताबिक छठी कक्षा में 22 बच्चों का दाखिला हो चुका है। लेकिन जब यहां पर जाकर देख तो एक भी बच्चा मौजूद नहीं मिला।
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देवीगढ़ का यह राजकीय स्कूल प्रशासन ने जिला के सबसे पहला बैगलैस स्कूल घोषित किया थ। लेकिन बैगलैस कक्षा में यहां रखे गए रैग बिल्कुल खाली है। यहां पर अभी तक पुस्तकें तक नहीं पहुंच गई। ऐसे में भला बच्चे कैसे बैगलेस शिक्षा प्राप्त कर पाएंगे।
इस स्कूल को अपग्रेड तो कर दिया। लेकिन यहां बच्चों की संख्या केवल नाममात्र ही है। इसके साथ ही यहां पर छठी कक्षा को बच्चों को पढ़ाने के लिए केवल एक अध्यापक ही है। उसे भी जाखौली के स्कूल से डेपुटेशन पर लगाया गया है।
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सरकार से मांगेंगे सहायता
यह सचाई है कि देवीगढ़ के राजकीय प्राइमरी स्कूल को सरकार द्वारा अपग्रेड किए नौ महीने हो चुके हैं, लेकिन यहां पर नियमानुसर प्राइमरी स्कूल के बच्चों को ही अगली कक्षा में बैठाया जाता है। रही भवन में कमरों को बढ़ाने और यहां अध्यापकों की संख्या को बढ़ाने की बात इसके लिए सरकार को जिला शिक्षा विभाग की ओर से पत्र को लिखकर कमरे बनाने के लिए ग्रांट मांगी जाएगी। पुस्तकें भी शीघ्र दी जाएंगी।
-रामकुमार, डीईओ, कैथल।
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