नसीब सैनी
कैथल। सात साल पहले जिले में शुरू हुई हेपेटाइटिस-सी की बीमारी का कहर अभी भी कम होने की बजाए बढ़ता जा रहा है। 2 लाख रुपये से भी अधिक की राशि से शुरू हुए इस बीमारी के ईलाज को अब सरकार ने पूरी तरह से निशुल्क कर दिया है। जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली है। लेकिन जमीनी स्तर पर बीमारी को फैलने से रोकने के लिए ज्यादा गंभीर प्रयास नहीं हो पा रहे हैं। जिस कारण हर माह 100 से ज्यादा मरीज सामने आ रहे हैं।
सात साल पहले राजौंद व जींद के साथ लगते गांवों में पता चला था बीमारी का:-सात साल पहले कैथल के राजौंद सहित आस-पास के गांवों व जींद के इसी के आस-पास के एरिया में इस बीमारी का कहर उजागर हुआ था। उस समय इसका ईलाज काफी महंगा था। जिस भी घर में टेस्ट करवाए गए, उसमें लगभग सभी घरों में इस बीमारी का प्रकोप नजर आया। दो लाख रुपये से भी अधिक की राशि खर्च कर इस बीमारी का ईलाज करवाया गया। एक सप्ताह में 13 से 15 हजार रुपये में एक इंजेकशन लगता था और ऐसे करीब 20 से ज्यादा इंजेकशन लगवाने पड़ते थे। बाद में सरकार ने अनुसूचित जाति व बीपीएल के लिए इस बीमारी का ईलाज निशुल्क कर दिया गया। लेकिन सामान्य वर्ग के गरीब लोगों ने भी मांग उठाई। अमर उजाला ने लगातार इस मुद्दे को उठाया और आज सरकार ने सभी वर्गों के लिए इस बीमारी का ईलाज निशुल्क कर दिया है। इसके लिए सरकारी अस्पताल के माध्यम से निजी लैब में निशुल्क टेस्ट होता है। खर्च सरकार देती है। बाद में इंलेकशन की बजाए इसकी गोलियां दी जाती हैं। जिनका परिणाम भी 95 प्रतिशत तक सही है।
घटने की बजाए बढ़ रहा है रोग:-जिले में अभी तक 2500 रोगियों ने सरकारी अस्पताल में रजिस्ट्रेशन करवा दिया है। जिनमें से 1600 को कूपन जारी किए जा चुके हैं। जिनके टेस्ट होने हैं और लगभग 1000 मरीजों का निशुल्क ईलाज चल रहा है। उन्हें दवा दी जा रही है। हर माह करीब 100 से ज्यादा मरीज नए सामने आ रहे हैं। अभी भी इसका ईलाज तो महंगा है, लेकिन खर्च सरकार उठा रही है। सबसे पहले जिला अस्पताल में 100 रुपये की फीस के साथ एक टेस्ट होता है। जिसमें बीमारी का पता चलने पर लैब से 4 से 5 हजार रुपये में होने वाला टेस्ट करवाया जाता है। जिसके लिए भुगतान सरकार देती है। इसके बाद जिनोटाइप टेस्ट होता है। इस पर भी बाजार में 5 हजार रुपये तक खर्च है। लेकिन मरीज का सरकार निशुल्क करवाती है। इसके बाद वायरस के लोड अनुसार दवा शुरू हो जाती है।
ये हैं कारण:-रोग बढने के मुख्य कारण एक ही सीरिंग का बार-बार प्रयोग।
असुरक्षित यौन संबंध।
शेव या कटिंग करवाते समय संक्रमित ब्लेड का प्रयोग।
ड्रग लेने वाले व्यक्ति। जो बार-बार एक ही सीरिंज से नशा करते हैं।
विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर जागरुकता या कारणों के निदान के लिए ज्यादा अभियान नहीं चलाया जा रहा। ईलाज बेशक निशुल्क कर दिया गया है। लेकिन बीमारी के खात्मे के लिए जरुरी है कि इसकी जड़ खत्म की जाए।
इस बीमारी के जिला नोडल अधिकारी डा. अनिल अग्रवाल ने कहा कि जिले में लगभग 2500 लोगों का रजिस्टे्रशन हो गया है। जो भी मरीज आता है, उसका टेस्ट करवाकर दवा शुरू करवाई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरुक भी किया जा रहा है।
कम होने की बजाए बढ़ रहा है हेपेटाइटिस-सी का मर्ज
जिले में हर माह जुड़ रहे हैं नए लगभग 100 से ज्यादा मरीज
2 लाख से ईलाज वाली बीमारी के लिए सरकार अब दे रही है निशुल्क ईलाज
लेकिन बीमारी की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर नहीं उठाए जा रहे कदम
झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा एक सीरिंज का डबल प्रयोग सहित कई अन्य कारणों से फैल रहा है रोग
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जिले में हर माह जुड़ रहे हैं नए लगभग 100 से ज्यादा मरीज