महज एक और पार्षद का समर्थन हासिल नहीं कर सकी भाजपा
नसीब सैनी
कैथल। चेयरमैन के खिलाफ दो तिहाई बहुमत के साथ अविश्वास प्रस्ताव की मांग करने वाले असंतुष्ट खेमे से पूरी भाजपा महज एक और पार्षद का समर्थन नहीं जुटा पाई। अंतत: 21 व 10 की संख्या के खेल में यशपाल प्रजापति को जन्मदिन के दिन चेयरमैनी खोनी पड़ी। कांग्रेस के 8 व असंतुष्ट खेमे के 13 पार्षद अंतिम समय तक एकजुट रहे और भाजपा के तमाम दावे महज दावे साबित हुए।
भाजपा की 9 सदस्यीय कमेटी सहित प्रभारियों के प्रयास नहीं आए काम : जिले के वरिष्ठ 9 भाजपा नेताओं की ड्यूटी यशपाल प्रजापति की कुर्सी बचाने के लिए लगाई गई थी। जिसमें पूर्व विधायक भाई लीला राम, रविभूषण गर्ग, राव सुरेंद्र सिंह, सुभाष हजवाना, राजपाल तंवर, अरुण सर्राफ जैसे नेता शामिल थे। साथ ही विधायक सुभाष सुधा व भाजपा के वरिष्ठ नेता राजीव जैन व जिला प्रभारी सत्यवान शेरा भी इस मुहिम में जुटे थे। सभी का दावा था कि प्रजापति चेयरमैन रहेंगे। 22 पार्षदों ने चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए शपथ दिया था। 20 दिनों में पूरी भाजपा व संघ परिवार केवल एक पार्षद को चेयरमैन खेमे में लाने में सफल हो सका। जबकि उन्हें यशपाल प्रजापति की कुर्सी बचाने के लिए महज एक और पार्षद का समर्थन चाहिए था। यदि उन्हें 11 पार्षदों का समर्थन मिल जाता तो कुर्सी बच जाती।
डीसी से थी गुप्त मतदान करवाने की उम्मीद
पूरा भाजपाई खेमा इस उम्मीद में था कि डीसी हर हाल में गुप्त मतदान करवाएंगी। ताकि 21 असंतुष्टों में से उन्हें अंतिम समय में केवल क्रॉस वोटिंग की उम्मीद जिंदा रहे। लेकिन यह रणदीप सुरजेवाला की कानूनी महारथ कही जाए या फिर 21 पार्षदों की एकजुटता। बैठते ही सभी ने हाथ खड़े करवाकर वोटिंग की मांग की तो डीसी ने इस पर सहमति दे दी। इस तरह से भाजपा की डीसी से जो रही-सही गुप्त मतदान से उम्मीद थी, वह भी जाती रही।
सुरजेवाला की रणनीति व असंतुष्टों की एकजुटता के आगे भाजपा की किरकिरी
परिषद चेयरमैन के मामले में भाजपा की खूब किरकिरी हुई है। 8 कांग्रेस समर्थक पार्षदों व भाजपा के 13 पार्षदों के सहयोग से विधायक एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की रणनीति के आगे भाजपा बेबस नजर आई। कहने को तो 13 पार्षद भाजपा समर्थक हैं। लेकिन बताया जा रहा है कि रणदीप सुरजेवाला की रणनीति के आगे भाजपा की एक नहीं चली।
कांग्रेसी नेताओं राजेश जागलान सहित अन्य ने कहा कि चेयरमैन यशपाल प्रजापति के घर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का नाश्ता, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे में चर्चा व 9 सदस्यीय कमेटी के तमाम दावों के बावजूद यशपाल प्रजापति कुर्सी नहीं बचा पाए। जिस तरह से गुजरात में अहमद पटेल की जीत में सुरजेवाला की अहम भूमिका रही, उसी तरह से हरियाणा में अकेले सुरजेवाला पूरी भाजपा का मुकाबला कर रहे हैं। चेयरमैन के मसले पर सुरजेवाला कांग्रेस पार्षदों के अलावा स्वयं भाजपा पार्षदों का भी विश्वास जीतने में सफल रहे।
बेबस व लाचार दिखी कैथल पुलिस
परिषद भवन के बाहर कांग्रेस व भाजपा कार्यकर्ताओं की मामूली कहासुनी को संभालने में कैथल पुलिस बेबस व लाचार दिखी। स्वयं पुलिस अधिकारियों को मारपीट का शिकार होना पड़ा। ऐसे में कैथल पुलिस की कार्यप्रणाली पूरी तरह से बेचारगी भरी नजर आ रही है। यहां तीन घंटों तक तीन-तीन डीएसपी एवं कई एसएचओ व भारी पुलिस बल स्थिति को काबू में नहीं रख पाया। यदि कोई बड़ा बवाल हो जाए तो यह जिला भगवान भरोसे नजर आ रहा है।
मेरी ड्यूटी लगाते तो परिणाम कुछ ओर होता
मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे रॉकी मित्तल ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री इस काम के लिए उनकी ड्यूटी लगाते तो सब ठीक रहता। उन्होंने राजीव जैन, सुभाष सुधा व 9 सदस्यीय कमेटी को सुझाव दिए थे। लेकिन उनके सुझावों पर कोई अमल नहीं किया गया। वर्ना आज गेम भाजपा की होती। मुख्यमंत्री को कैथल में ऐसे लोगों को आगे लाना चाहिए जो जनता से जुड़े हों। भाजपा के कुछ जिला नेताओं ने मुख्यमंत्री को गुमराह किया है।
तीन कारणों से गई चेयरमैन की कुर्सी
एक साल पूर्व परिषद में खेवनहार बने पार्षद प्रतिनिधि एडवोकेट धर्मबीर भोला के अनुसार तीन मुख्य कारण रहे, जिस कारण चेयरमैन को कुर्सी खोनी पड़ी।
1. उनकी पीठ में छुरा घोंपते हुए हर काम में उनकी अनदेखी की गई। जबकि उन्होंने प्रजापति को कमेटी का हर तौर-तरीका सीखाया।
2. चेयरमैन की दबाव की राजनीति पार्षदों को रास नहीं आई। अनदेखी, भ्रष्टाचार व मृदुभाषी न होने के कारण पार्षद उनके खिलाफ हो गए।
3. भाजपा संगठन ने असंतुष्टों की पूरी तरह से अनदेखी की। 9 सदस्यीय कमेटी बैठक करती रही। किसी असंतुष्ट को मनाने का प्रयास नहीं किया। चेयरमैन पार्षदों के सहयोग से बना था। उनका विश्वास हटा तो कुर्सी खोनी पड़ी।