हमको यही सिला मिला है बातचीत का, ताबूत फिर आ गया है घर पे मीत का
साहित्य सभा की गोष्ठी में शहीदों को किया नमन
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। साहित्य सभा की मासिक गोष्ठी का आयोजन आरकेएसडी कॉलेज में किया गया। जिसकी अध्यक्षता साहित्यकार रामकुमार अत्रे व संचालन रिसाल जांगड़ा व डॉ. प्रद्युमन भल्ला ने किया। जिसमें सिरसा के साहित्यकार रूप देवगुण मुख्यातिथि व डॉ. कमलेश संधू ने विशिष्ट अतिथि की भूमिका निभाई। वरिष्ठ समीक्षक रूप देवगुण, रामकुमार आत्रेय, अमृत लाल मदान ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। रूप देवगुण की दो पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।
काव्य गोष्ठी का आरंभ राजेश भारती की कविता मां जादूगर से हुआ। शमशेर कैंदल ने कहा कि राजनीति विकराल हो गई, जोड़-तोड़ का जंजाल हो गई। चेतन चौहान ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि हम को यही सिला मिला है बातचीत का, ताबूत फिर आ गया है घर पे मीत का। डॉ. प्रद्युमन भल्ला ने कहा कि नहीं भूलती है तुम्हारी वफाएं, बख्शी हैं तुमने हमारी खताएं, रामकुमार आत्रे के शब्द कुछ यूं रहे- लड़कियां अंधेरे तहखानों में खुलती खिड़कियां होती हैं। डॉ. कमलेश संधू ने कहा सरहदों की आंधी, चिरागों को बुझा रही है। रिसाल जांगड़ा ने हरियाणवी अंदाज में फरमाया कि गहराई तक जाने में वक्त तो लाग्गे सै, सच्चाई ऊपर आने में वक्त तो लाग्गे सै। इनके अतिरिक्त गोष्ठी में विजयपाल, हरीश सेठी, राजपाल, राजकुमारी मदान, सरोज जोशी, पंकज दयौरा, बाल कवि युवराज, रामफल गौड़ ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से सबका ध्यान खींचा। विजय पाल, राधेश्याम भारतीय, कमलेश शर्मा, महेंद्र पाल सारस्वत, चतुर्भुज बंसल ने भी काव्य पाठ किया। गोष्ठी में राजकुमारी मदान की लघुकथा वसीयत, रिसाल जांगड़ा की लघुकथा बंधन, शमशेर कैंदल ने भगदड़ और रामफल गौड़ ने ममता लघुकथाओं के माध्यम से वाहवाही बटोरी। अंत में सभा के प्रधान अमृत लाल मदान ने आए हुए अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।