दोपहर बाद तक रहा पूर्ण चक्का जाम, इसके बाद 27 डीसी रेट के व 14 वेटिंग लिस्ट के चालकों की मदद से चलाई 41 बसें
पंजाब, राजस्थान व चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट की नहीं पहुंची बसें, 70 निजी बसों से नहीं हुई जरूरतें पूरीं, लोग रहे परेशान, दो कर्मचारियों को किया गया टर्मिनेट
सोमवार को
फोटो नंबर-09 से 14
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के बीच सातवें दिन भी दोपहर बाद तक पूर्ण चक्का जाम रहा। सोमवार को चंडीगढ़, पंजाब व राजस्थान रोडवेज की बसें कैथल नहीं आईं। जिस कारण केवल 70 निजी बसों से ही परिवहन सेवाएं जारी रहीं। दोपहर बाद सरकार द्वारा डीसी रेट पर भर्ती किए गए 27 व वेटिंग लिस्ट के 14 ड्राइवरों की मदद से 41 बसें चलाई गईं। जिससे शाम तक यात्रियों को काफी राहत मिली।
तीन दिनों से की गई स्कूल बसों की व्यवस्था सोमवार को बंद हो गई। इसके बाद दोपहर बाद तक केवल प्राइवेट बसें ही चलीं। हरियाणा रोडवेज की बसों का पूर्ण चक्का जाम रहा। जिससे यात्रियों की परेशानी अधिक बढ़ गई। उन्हें अपने गंतव्य तक जाने के लिए दो से तीन घंटे तक बस स्टैंड तक बस के इंतजार में खड़े रहे। वहीं स्कूल बसों के न आने से पूरा दिन निजी बसों के सहारे दिन में परिवहन सेवा चलाई गई। उधर हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने हनुमान वाटिका पार्क में बैठकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। सरकार ने सख्ती लागू करते हुए जहां दो कर्मचारियों को टर्मिनेट किया वहीं दोपहर बाद डीसी रेट पर ठेके के माध्यम से ड्राइवरों को भर्ती करके बसों का संचालन शुरू कर दिया।
घंटो तक भटकते रहे यात्री : समाना निवासी कुलवंत सिंह ने बताया कि वह कंबाईन का फोरमेन है। एमपी से काम करके वापस लौटा है। उसे समाना जाना था। पिछले एक घंटे से पटियाला या समाना की कोई बस नहीं आई है। काफी परेशानी हो रही है।
वहीं पातड़ा निवासी सोनी कौर ने बताया कि वह पानीपत में अपने रिश्तेदार के यहां गई थी। आज घर जा रही है। पानीपत से कैथल तक आने में दो की जगह चार घंटे लग गए। पहले करनाल आई फिर करनाल से पूंडरी, इसके एक घंटे बाद पूंडरी से कैथल की बस मिली। अब पिछले एक घंटे से पातड़ा जाने वाली बस का इंतजार कर रही हूं। लेकिन बस नहीं मिली।
सरकार ने की सख्ती, दोपहर तक कैथल रोडवेज से दो ड्राइवर टर्मिनेट : रोडवेज कर्मियों की हड़ताल पर सरकार ने अपना कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जिसके तहत सख्ती बरतते हुए सरकार ने दोपहर बाद दो ड्राइवरों को टर्मिनेट कर दिया।
छह बजे तक 41 बसें रूट पर निकलीं : वहीं पिछले सात दिन से परेशान हो रहे यात्रियों को सुविधा देने के लिहाज से सोमवार को सरकार के आदेशों के तहत ठेकेदार के माध्यम से 27 ड्राइवरों को भर्ती करके दोपहर तीन बजे के बाद बसों का संचालन शुरू किया गया। शाम छह बजे तक विभाग के आला अधिकारियों ने वेटिंग लिस्ट के 14 ड्राइवरों सहित डीसी रेट पर 41 ड्राइवरों को ड्यूटी ज्वाइन करवा दी। इसके बाद कुल 41 बसें अलग अलग रूटों पर दौड़ी। जिसमें से पांच बसों पर रोडवेज के कंडक्टरों ने टिकट काटी।
जीएम रामकुमार भुक्कल ने बताया कि सरकार के आदेशों के तहत दो ड्राइवरों को टर्मिनेट करने के आदेश जारी हुए है। वहीं डीसी रेट के तहत आरटीआई के ठेकेदार के माध्यम से 14 वेटिंग लिस्ट वाले ड्राइवरों सहित 27 नए ड्राइवरों को भर्ती कर 41 बसों का संचालन शुरू किया गया है।
छह दिन से गिरफ्तार दूसरे विभागों के कर्मचारियों को नहीं दी जा रही 107-51 के तहत जमानत
वकीलों ने जताया रोष तो डीसी ने कहा- उच्चाधिकारियों द्वारा निर्देश प्राप्त होने के बाद ही जमानत के लिए कहा जाएगा
लघु सचिवालय में वकीलों के साथ कर्मचारियों ने दिया धरना
फोटो संख्या-150
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में चार दिन पूर्व गिरफ्तार किए गए 150 से अधिक दूसरे विभागों व समाजसेवी संगठनों के पदाधिकारियों की 107-51 की धारा में जमानत न मिलने पर कर्मचारियों ने वकीलों के साथ सोमवार दोपहर बाद लघु सचिवालय में धरना शुरू कर दिया। किसी भी अधिकारी ने इन कर्मचारियों की जमानत नहीं ली। जबकि नियमानुसार इस धारा में एक दिन में जमानत ली जाती है।
जन स्वास्थ्य विभाग के काफी संख्या में कर्मचारी सोमवार दोपहर बाद 18 अक्तूूबर को गिरफ्तार किए गए अपने साथियों की जमानत करवाने के लिए पहुंचे। कर्मचारियों ने विभाग के कर्मचारियों से पब्लिक हेल्थ के गिरफ्तार कर्मचारियों की जमानत लेने के लिए कहा। लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। यहां एक कर्मचारी ने बताया कि डीडीपीओ कंवर दमन सिंह अवकाश पर चले गए हैं। पब्लिक हेल्थ के गिरफ्तार कर्मचारियों के चालान की फाइल भी उन्हीं के पास है। इसलिए उनके बाद एसडीएम जमानत ले सकती हैं। इस पर ताव में आए कर्मचारियों ने डीडीपीओ के कार्यालय में धरना शुरू कर दिया। मैकेनिकल वर्कर्स यूनियन के जिला प्रधान धर्मचंद नैन ने बताया कि उनके गिरफ्तार साथियों की जमानत लेने के लिए प्रशासन आनाकानी कर रहा है। इसके बाद ग्रामीण सफाई मजदूर यूनियन के सदस्यों के साथ पब्लिक हेल्थ के कर्मचारी अपने साथियों की जमानत करवाने के लिए एसडीएम कमलप्रीत कौर के कार्यालय पहुंचे। लेकिन एसडीएम ने कहा कि उनके पास राजौंद क्षेत्र है। वह उसी इलाके की ड्यूटी मजिस्ट्रेट हैं। इसलिए शहर की गिरफ्तारियों की जमानत लेना उनके कार्य क्षेत्र से बाहर है।
अधिवक्ता एडवोकेट दिनेश त्यागी ने कहा कि पुलिस सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर 7 साल से कम सजा वाले केस में थाने में जमानत ले लेती है। पिछले दिनों गुहला में एक डकैती के केस में भी थाने में ही जमानत ले ली गई। लेकिन कर्मचारियों को डकैतों से भी बड़ा मुजरिम करार दिया जा रहा है। कर्मचारियों की जमानत न लेना सरकार को महंगा पड़ेगा। इसके बाद सभी कर्मचारी डीसी कार्यालय मेें गए और डीसी से जमानत लेने का अनुरोध किया। लेकिन कर्मचारियों को जमानत नहीं मिली। इस मौके पर मैकेनिकल कर्मचारियों के सचिव राजेश कुमार, ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन सीटू से संबंधित यूनियन के प्रधान बसाऊ राम मौजूद रहे।
डीडीपीओ कंवर दमन सिंह ने कहा कि उनका भतीजा चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती है। इसी कारण वे अवकाश पर हैं।
डीसी धर्मबीर सिंह ने तो सीधा कह दिया कि कर्मचारियों की हड़ताल का मामला है। इसलिए वे उच्चाधिकारियों से निर्देश प्राप्त कर जमानत करने के निर्देश देंगे।