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डेरा प्रमुख को सजा का का ऐलान के बाद जिले में शांति

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डेरा प्रमुख को सजा के ऐलान के बाद जिले में रही शांति
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को सीबीआई कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद संभावित हिंसा से जिला अछूता रहा। सोमवार को दोपहर बाद लोग टीवी से चिपके रहे। करीब साढ़े तीन बजे सजा सुनाए जाने के बावजूद पूरे जिले में कहीं भी छोटी-बड़ी वारदात की सूचना नहीं आईं। इससे पूर्व जिला प्रशासन ने बीएसएफ व एसएसबी की टुकड़ियों के साथ जिले भर में फ्लैग मार्च निकाल कर सुरक्षा के लिए विश्वास दिलवाया। पिछले चार दिनों से बंद शिक्षण संस्थान मंगलवार से खोले जाएंगे। रोडवेज की बसों व ट्रेनों को चलाने के लिए अभी आदेश नहीं आए हैं।
डीसी सुनीता वर्मा के निर्देशानुसार जिला मुख्यालय सहित विभिन्न कस्बों में पुलिस बल द्वारा उच्चाधिकारियों के नेतृत्व में फ्लैग मार्च निकाला गया। एसपी सुमेर प्रताप सिंह एवं एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह के नेतृत्व में लघु सचिवालय से कैथल नगर के विभिन्न हिस्सों से सीवन बाईपास चौक तक फ्लैग मार्च निकाला गया। लघु सचिवालय परिसर से शुरू हुआ फ्लैग मार्च ढांड रोड, कुरुक्षेत्र चौक, नया बस स्टैंड, करनाल चौक, देवीगढ़ बाईपास, डेरा सच्चा सौदा, जींद बाईपास, आईटीआई, अनाज मंडी रोड, रेलवे ऊपरगामी पुल, पुराना बस स्टैंड, पेहवा चौक, छोटू राम चौक, आरकेएसडी कालेज, अंबाला बाईपास, खुराना बाईपास, सीवन बाईपास से फ्लैग मार्च निकालते हुए गाड़ियों का काफिला सीवन के लिए रवाना हुआ। इस काफिले में उच्चाधिकारियों तथा पुलिस बल की लगभग 25 गाड़ियां शामिल थी, जिनमें एंबुलेंस, पुलिस की छोटी एवं बड़ी बस भी शामिल थी। जवाहर पार्क से आरकेएसडी कालेज तक पुलिस बल के साथ पैदल मार्च किया।
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एसपी ने नया बस स्टैंड परिसर में ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल के जवानों तथा परिवहन के स्टाफ को संबोधित करते हुए कहा कि वे सभी निडर होकर सरकारी संपत्ति की सुरक्षा करें। उन्होंने कहा कि जिला में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं तथा केवल 5 मिनट में पुलिस बल किसी भी स्थान पर पहुंचने में सक्षम है। एडीसी ने कहा कि जिले में स्थिति पूरी तरह से शांतिपूर्ण एवं नियंत्रण में है।

गुहला में भी किया फ्लैग मार्च
गुहला-चीका। एसपी सुमेर प्रताप सिंह, एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह तथा एसडीएम सुरेंद्र पाल के नेतृत्व में चीका के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल के जवानों ने फ्लैग मार्च किया। इससे पूर्व सीवन में पुलिस बल द्वारा फ्लैग मार्च करते हुए लोगों में सुरक्षा की भावना प्रबल की।

राजौंद में सामान्य रही स्थिति
राजौंद। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाए जाने के बाद नगर में स्थिति सामान्य थी। किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना का समाचार नही है। हालांकि पुलिस स्थिति पर पूरी तरह नजर रखे हुए है। सोमवार को एसडीएम कैथल, डीएसपी सतीश गौतम, मजिस्ट्रेट निर्मल सिंह, एसएचओ राजौंद रामकिशन द्वारा नगर में फ्लैग मार्च भी किया गया था। राजौंद पुलिस भी चप्पे चप्पे पर नजर रखे हुए थी। विद्युत प्रसारण निगम पर 25 अगस्त को घटी घटना को लेकर निगम के अधिकारी व कर्मचारियों के साथ साथ पुलिस भी पूरी तरह तैनात रही। एसडीओ गुरदीप सिंह हांडा ने बताया कि वह पिछले चार दिनों से लगातार कर्मचारियों के साथ विद्युत प्रसारण निगम का पहरा दिया जा रहा है। इसके अलावा खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय, नगरपालिका कार्यालय व राजस्व विभाग के कार्यालयों पर भी पुलिस सुरक्षा लगाई हुई है।
राजौंद थाना प्रभारी रामकिशन ने बताया कि डेरा प्रमुख को सजा सुनाए जाने के बाद उन्होंने पुलिस फोर्स के साथ लगभग क्षेत्र के सभी गांवों में मार्च किया है।

डेरों के अंदर व बाहर बनीं रही शांति
डेरा प्रमुख को सजा से पूर्व सब कुछ तहस-नहस करने का दावा करने वाले कुछ डेरा प्रेमियों को लेकर चार दिन पूर्व काफी खौफ बना हुआ था। किसी व्यक्ति की डेरे के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं थी। लेकिन सोमवार को डेरा प्रमुख को सजा सुनाए जाने के बाद कैथल में डेरे सहित सभी नाम चर्चा घरों के बाहर व अंदर शांति बनीं रहीं। कहीं भी डेरा प्रेमियों के एकत्रित होने या प्रतिक्रिया व्यक्त करने की जानकारी नहीं मिल पाई।

आखिर कहां गया डेरे से मिला पेट्रोल?
कैथल। जिला प्रशासन द्वारा 26 अगस्त को कैथल में स्थित डेरा सच्चा सौदा की तलाशी लेकर इसे सील कर दिया था। इस दौरान एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह सहित एसपी व बाद में स्वयं डीसी ने यह जानकारी दी थी कि डेरे में पेट्रोल मिला है। तीन खाली ड्रमों के अलावा एक ड्रम में पेट्रोल था। जिसे अधिकारियों ने ड्रम को हिला कर देखा तो ड्रम हिला भी नहीं था। लेकिन जब पुलिस द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई तो उसमें केवल खाली ड्रमों का खुलासा किया गया। बार-बार पूछने के बावजूद एडीसी सहित एसपी इस बात पर कायम थे कि पेट्रोल मिला है। लेकिन एसएचओ सिविल लाइन ने देर रात स्पष्ट किया कि वहां पेट्रोल नहीं था। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अधिकारियों की जांच में पेट्रोल था तो बाद में भारी मात्रा में मिले पेट्रोल को कौन पी गया? यह न केवल जांच का विषय है बल्कि यह भी सवाल खड़े करता है कि आखिर किसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है? इस पूरे प्रकरण में कुछ पुलिस कर्मचारियों व अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है।

टीवी से चिपके रहे लोग, वीरान रही सड़कें
दोपहर ढाई बजे सजा सुनाए जाने का समय निर्धारित था। लेकिन लोग 2 बजे से ही टीवी के सामने बैठ गए। करीब साढ़े तीन बजे जाकर सजा का एलान हुआ। इस दौरान सड़कें वीरान हो गईं। लोग सजा के फैसले को लेकर उत्सुक थे।
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डेरा प्रेमियों का होने लगा है मोह भंग
30 साल से डेरा प्रेमी एक वरिष्ठ कर्मचारी ने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से डेरे का प्रेमी रहा है। लेकिन जो घटनाक्रम पिछले दिनों हुआ है। यह दुखद ही नहीं शर्मनाक है। उनका मानना है कि 80 प्रतिशत डेरा प्रेमियों का मोह भंग हो गया है। क्योंकि सच्चाई सामने आ चुकी है।
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