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देवबन से राजौंद तक खस्ता हाल सड़क....

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इलाके के विधायक बोले- चूंकि केंद्र से पैसा आया है इसलिए राज्य सरकार नहीं दे रही ध्यान
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भाजपा प्रत्याशी रहे धर्मपाल शर्मा बोले : सीएम से मिलकर जल्द करवाया जाएगा समस्या का समाधान
देवबन से राजौंद तक सड़क की खस्ता हाल का मामला, दस माह से बदहाल सड़क से गुजर रहे लोग, बना रहता है हादसे का डर
फोटो संख्या-35, 36, 37 व 38
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। कैथल-दिल्ली वाया सफीदों असंध मार्ग के गांव देवबन से राजौंद तक 20 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य में हो रही देरी लोगों पर भारी पड़ रही है। अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। आलम यह है कि लोगों के वाहनों की तो हालत खस्ता हो ही रही है, गड्ढों में सड़क ढूंढने के कारण हादसों का डर बना हुआ है। निर्दलीय विधायक जयप्रकाश ने सरकार के गड्ढे मुक्त सड़क के नारे को खोखला करार दिया है। जबकि भाजपा प्रत्याशी रहे धर्मपाल शर्मा का कहना है कि इस सड़क का निर्माण कार्य जल्द शुरू करवाया जाएगा।
यह है मामला : केंद्र सरकार के सड़क फंड से देबवन से राजौंद तक करीब 20 किलोमीटर लंबी सड़क को 3 मीटर चौड़ा करके 10 मीटर चौड़ा किया जाना है। वर्तमान में यह 7 मीटर चौड़ी है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा 20 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई। जिसके लिए मार्च 2018 में टेंडर छोड़ दिया गया। वन विभाग, लोक निर्माण विभाग की आपसी लेटलतीफी व निर्माण कार्य का ठेका लेने वाली एजेंसी की मनमानी का आलम यह है कि अभी तक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जबकि टेंडर अलॉट हुए 11 माह का समय बीत चुका है।
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सड़क की हालत ऐसी है कि इसमें 20 किलोमीटर तक एक भी जगह ऐसी नहीं आती कि चार पहिया वाहन चालक टॉप गियर लगा सकें। दोपहिया वाहन चालकों को तो परेशानी होती ही है।
सरकार इस परेशानी की ओर दे ध्यान : गांव राजौंद निवासी दुर्गा राम ने कहा कि इस सड़क की खस्ता हालत के कारण वे सभी परेशान हैं। सरकार से मांग है कि इस ओर ध्यान दिया जाए। यहां हर रोज हादसे हो रहे हैं। 19 जनवरी को भी जाखौली में नहर पुल के ऊपर एक ट्रक पलटा हुआ था।
राज्य सरकार केवल घोषणा करती है : कलायत से निर्दलीय विधायक जयप्रकाश ने कहा कि यह बात सही है कि देवबन से राजौंद तक बनने वाली सड़क, सड़क नहीं गड्ढे हैं। सरकार दावा करती है कि प्रदेश की सड़कें गड्ढे मुक्त हो गई हैं। लेकिन यह सड़क गड्ढों में ही तब्दील हो गई है। इसके लिए केंद्र से राशि आई थी। इसलिए राज्य सरकार द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा। मैं स्वयं पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से बात कर चुका हूं। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। राज्य सरकार केवल घोषणा करती है, टेंडर छोड़ती है। लेकिन जब तक टेंडर पर काम नहीं होगा, घोषणाओं पर काम नहीं होगा, तब तक लोगों को राहत कैसे मिलेगी। विधायक ने कहा कि वे शीघ्र ही पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर से मिलकर इसके निर्माण में हो रही देरी का मुद्दा उठाएंगे। साथ ही मांग करेंगे कि यदि यह एजेंसी काम नहीं करती तो इसका टेंडर रद्द किया जाए।
सीएम से जारी करवाऊंगा अधिकारियों को निर्देश : वहीं कलायत में भाजपा प्रत्याशी रहे धर्मपाल शर्मा ने कहा कि यह समस्या उनके संज्ञान में हैं। इस बारे में शीघ्र ही अधिकारियों से बात करके काम शुरू करवाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिलकर संबंधित अधिकारियों को काम करने के निर्देश जारी करवाए जाएंगे।
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सरकार का ध्यान काम में नहीं, प्रचार में ज्यादा है : माजरा
पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने कहा कि देवबन से राजौंद तक की सड़क की खस्ता हाल से क्या कोई भाजपा नेता या अधिकारी वाकिफ नहीं हैं। क्या वे इस सड़क से नहीं गुजरते? क्या उन्हें इस समस्या का बोध नहीं हैं? सभी जानते हैं कि सड़क की हालत क्या है। लेकिन चूंकि भाजपा सरकार का लोगों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं हैं। टेंडर छोड़े हुए 10 माह से ज्यादा का समय हो गया है। सरकार में बैठे नेताओं को चाहिए कि वे अधिकारियों से जवाब तलब करें, आखिर टेंडर छोड़ने के बावजूद ऐसी कौन सी ताकत है, जो यहां काम न करने पर भी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने दे रही? यदि इस सड़क का निर्माण कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ तो इनेलो द्वारा आंदोलन भी किया जा सकता है।
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