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एजेंसी सड़क निर्माण नहीं करती है तो टेंडर रद्द करे सरकार

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एजेंसी सड़क निर्माण नहीं करती है तो टेंडर रद्द करे सरकार
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राजौंद क्षेत्र से उठी राजनीतिक आवाज, कहा-खस्ताहाल सड़क से हो रही लोगों को परेशानी
20 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट अधिकारियों की अनदेखी के कारण लटका
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। देवबन से राजौंद तक सड़क निर्माण कार्य को लेट होने पर अब लोगों में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कई पार्टियों के नेताओं ने जल्द काम शुरू न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
विदित रहे कि सरकार ने मार्च 2018 में सरकार ने देवबन से राजौंद तक सड़क निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपये का टेंडर छोड़ा था। जिसके लिए सितंबर 2019 में काम पूरा करने की तिथि निर्धारित है। लेकिन स्थिति यह है कि अभी तक इस सड़क के निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है। वन विभाग द्वारा इस संबंध में जड़ें उखाड़ने के लिए जिस ठेकेदार को ठेका दिया गया है, वह जड़ें भी नहीं उखाड़ रहा।
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सर छोटू राम विचार मंच के कार्यकारी जिला अध्यक्ष सुरेंद्र ढुल ने कहा कि वन विभाग व पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों द्वारा इस मामले को लेकर करीब-करीब आंखें ही बंद कर ली गई हैं। सड़क पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। लोगों को इस सड़क की खस्ता हालत के कारण काफी परेशानी हो रही है। वाहनों का नुकसान तो हो ही रहा है। साथ ही जान-माल के नुकसान का भी अंदेशा है। सरकार से मांग है कि यदि कोई एजेंसी ठेका लेने के बावजूद भी सड़क निर्माण नहीं करती है तो उसका टेंडर रद्द किया जाए। किसी दूसरी एजेंसी को यह ठेका दिया जाए।
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जन नायक जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता बलवान कोटड़ा ने कहा कि अधिकारियों के कानों पर कोई जूं तक नहीं रेंगी। क्या कोई अधिकारी इस सड़क से नहीं गुजरता। उन्हें सड़क की खस्ता हाल दिखाई नहीं देती। सड़क के लिए जब सरकार ने बजट दे दिया है, तो क्यों इसे बनाने में देरी की जा रही है? उनका अधिकारियों से आग्रह है कि सरकार के निर्देश अनुसार इस सड़क को बनाकर लोगों को राहत दें। अन्यथा जजपा इसको लेकर आंदोलन करेगी।
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