स्वच्छ मैप एप का रियलिटी चेक : सर्वर रहता है डाउन, नहीं होती दर्ज शिकायतें, कैसे होगी शहर की सफाई
एक दिन में आती हैं केवल 30 से 40 शिकायतें, उनका भी नहीं होता समाधान, डेढ़ महीने की 550 शिकायतें हैं पेंडिंग
फोटो नंबर-16 व 17
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। पूरे देश में स्वच्छता सर्वेक्षण की चार जनवरी से शुरुआत हो चुकी है। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से दो वर्ष पहले शुरू किए गए स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत जारी स्वच्छ मैप एप को चलाने में सर्वर विलेन बना हुआ है। मतलब इसका सर्वर हमेशा डाउन रहता है, जिससे इस एप का सही प्रयोग नहीं हो रहा। अमर उजाला की ओर से स्वच्छ मैप एप का रियलिटी चेक किया गया। जिसके तहत इसमें डाली वाली जाने वाली शिकायतों की जांच की गई।
बता दें कि स्वच्छता मैप लोगों को सफाई की सुविधा के उद्देश्य से शुरू किया गया। जिसमें 24 घंटे तक गंदगी की समस्या का सफाई से समाधान किया जाता है। लेकिन मैप का सर्वर डाउन रहने से लोग इसका कोई फायदा नहीं उठा सकते। जिससे यह एप अब एक महज दिखावा बन कर रह गई है।
नहीं हुआ कोई समाधान : शहरवासी पुनीत ने बताया कि वह पिछले काफी समय से स्वच्छता मैप का प्रयोग करता आ रहा है। पहले स्वच्छता मैप पर फोटो डालने के बाद यहां पर सफाई हो जाती थी। अब पिछले कुछ दिनों से स्वच्छता मैप डाउनलोड तो हो जाता है। लेकिन सर्वर डाउन होने के कारण इस पर फोटो अपलोड नहीं हो पाती है। काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
एप डाउनलोड करने के लिए लगाए थे सक्षम युवा : विदित रहे कि इस एप को डाउनलोड करवाने के लिए नप की ओर से 70 सक्षम युवाओं को लगाया गया थे। जिन्होंने दो हजार से अधिक फोनों में एप डाउनलोड करवा दी थी। लेकिन सर्वर डाउन होने के कारण नप से मिले आंकड़ों के अनुसार अब एक हजार फोन में भी एप नहीं है।
कैसे होगी शहर की सफाई, आती केवल 30 से 40 शिकायतें, नहीं होता समाधान : स्वच्छता सर्वेक्षण में पब्लिक फीडबैक के तहत मिलने वाले अंकों में स्वच्छता मैप का अहम रोल है। लेकिन स्वच्छता मैप का सर्वर डाउन होने से मिलने वाले अंकों में कमी होगी।
सर्वर डाउन होना तकनीकी समस्या : ईओ अशोक कुमार ने कहा कि एप केंद्र सरकार का उपक्रम है। केंद्र सरकार के माध्यम से एप की निगरानी होती है। सर्वर डाउन होना तकनीकी समस्या है।
अभी तक स्वच्छता मैप एप में 550 शिकायतें हैं लंबित : स्वच्छ मैप की एप का सर्वर डाउन होने से नप में एप में लोकेशन के माध्यम से आई शिकायतों का भी निवारण नहीं हो रहा है। जिससे शहरवासी काफी परेशान हैं। पिछले डेढ़ महीने की करीब 550 से अधिक शिकायत अभी तक पेंडिंग पड़ी हैं। जबकि नियमों के मुताबिक इन शिकायतों का 24 घंटे में निपटारा करना होता है।