आरटीए कार्यालय से खत्म होगी दलालों की भूमिका
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। आरटीए कार्यालय में सक्रिय दलालों की भूमिका अब लगभग खत्म होने जा रही है। विभाग ने ऑनलाइन चालान करने की नीति लागू की है। जिसमें वाहन की जांच करने वाली टीम को मौके पर ही चालान करना होगा। जिसे वाहन चालक चाहेगा तो उसी समय ऑनलाइन भुगत सकेगा। इससे एक तो उसे चालान भरने के लिए आरटीए कार्यालय का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा, दूसरा चालान भरने के लिए फाइल बनवाने या फिर कार्यालय में चालान भुगतवाने में दलालों के पीछे भी नहीं भागना पड़ेगा। ई-चालान से चालान करने वाली टीम के अधिकारियों व कर्मचारियों की मनमानी पर भी रोक लगेगी।
आरटीए कार्यालय के अधिकारियों द्वारा जिले भर से गुजरने वाले वाहनों की जांच करके खामी पाए जाने पर चालान किए जाते हैं। वर्तमान में चालान की जुर्माना राशि कई गाड़ियों में तो 70 से 80 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इस राशि का भुगतान इस समय वाहन चालक को आरटीए कार्यालय में जाकर करना पड़ता है। जहां फार्म आदि तैयार करवाने, चालक का समय बचे, इसके लिए दलालों का सहारा लेना पड़ता है। साथ ही कई बार तो लोड की हुई गाड़ी भी संबंधित जिले में एक-दो दिन तक खड़ी रहती है। छुट्टी का दिन हो तो कार्यालय खुलने का इंतजार रहता है।
अब कार्यालय तक जाने की नहीं रहेगी जरूरत : ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा जो ई-चालान व्यवस्था अपनाई जा रही है। उसके अनुसार चालान करने वाली टीम को एक टैबलेट दिया जाएगा। जो ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ा होगा और जीपीआरएस से भी कनेक्ट रहेगा। टीम जहां पर खड़ी होकर वाहनों की जांच कर रही है, उसकी लोकेशन जीपीआरएस के माध्यम से विभाग को पता रहेगी। वाहन में जो भी खामी है, उसका फोटो लेकर उसे ऑनलाइन अपलोड करना होगा। इसके बाद उसी समय संबंधी खामी का चालान करना होगा।
मौके पर ही कर सकेगा भुगतान : यदि वाहन चालक चाहेगा तो वह अपने खाते या ऑनलाइन माध्यमों का प्रयोग करके उसी समय अपने चालान की राशि का भुगतान करके अपने गंतव्य पर आगे जा सकेगा। कई बार चालान टीम के कर्मचारी व अधिकारी चालान करने में बारगेनिंग भी कर जाते हैं, चालान कम या अधिक राशि का कट जाता है। अब ऐसा नहीं होगा, फोटो अपलोड होने पर खामी स्पष्ट नजर आएगी। कर्मचारी न तो कम राशि का चालान कर सकेंगे और न ही जानबूझ कर अधिक राशि का चालान कर सकेंगे।
वाहन चालकों का समय बचेगा, बेगार से भी मिलेगा छुटकारा : नई प्रक्रिया से वाहन चालकों का समय बचेगा। उदहारण के लिए यदि एक वाहन मालिक अपने ट्रक को दिल्ली लेकर जा रहा है और उसका ओवरलोडिंग का कैथल में चालान हो जाता है तो उसे समय निकाल कर कार्यालय में जाकर अपने चालान का भुगतान करना पड़ता है। लेकिन मौके पर ही भुगतान की सुविधा से उसका समय बचेगा और वह अपने गंतव्य की ओर बढ़ सकेगा।
एक वाहन मालिक गुरविंद्र का कहना है कि चालान भुगतान करना विभाग में अपने आप में एक टेढ़ी खीर है। यदि ई-चालान से मौके पर ही भुगतान की सुविधा होगी तो लोगों को काफी राहत मिलेगी।
इन खामियों पर किया जाता है मुख्यत: चालान : आरटीए कार्यालय की टीम द्वारा वाहन चालकों का निम्न खामियों पर चालान किया जाता है।
1. ओवरलोडिंग
2. बिना आवश्यक परमिट
3. मोटर व्हीकल टेक्स
4. बिना सुरक्षा नंबर की प्लेट
5. ड्राइविंग लाइसेंस
जब तक ई-चालान का भुगतान नहीं होगा, तब तक उस वाहन से संबंधित कोई काम पूरा नहीं होगा : विभाग के सचिव लेखराज का कहना है कि जो चालान ऑनलाइन हो जाएगा, जब तक उसके चालान का भुगतान नहीं हो जाएगा, तब तक उस वाहन से संबंधित पासिंग, रजिस्ट्रेशन, परमिट रिन्यू जैसा कोई काम नहीं हो पाएगा। चालान एक तरह से ब्लॉक होकर ऑनलाइन रिकार्ड में दर्ज हो जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी होगी।
कैथल जिले में अक्टूबर माह में 200 से अधिक ओवरलोडेड वाहन पकड़े गए। जिन पर 35 लाख 77 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस माह अभी तक करीब 16 लाख रुपये का जुर्माना वाहन चालकों पर लगाया गया है।
विभागीय सिस्टम में पारदर्शिता, वाहन मालिकों व चालकों की सुविधा, दलालों की भूमिका खत्म करने और कामकाज में तेजी लाए जाने के लिए ई-चालान व्यवस्था शुरू की जा रही है। इससे न कर्मचारी, न वाहन मालिक या चालक और न ही कोई बिचौलिया गलत काम कर पाएगा। ई-चालान से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो जाएगी।
कैप्टन शक्ति सिंह, रिजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी एवं एडीसी, कैथल।
-ओवरलोडिंग व किसी अन्य खामी पर चालान हुआ तो ऑनलाइन कर सकेंगे भुगतान, चालान करने वाली टीम को दिए जाएंगे टैबलेट
- बाद में नहीं हो पाएगी चालान से छेड़छाड़, फोटो अपलोड करके मौके पर ही बतानी होगी चालक को उसकी खामी
फोटो संख्या-1 व 2, 3