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Kaithal News: एक साल में 69 बसें बेड़े से बाहर, डिपो में बचीं सिर्फ 152

Mon, 03 Aug 2026 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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डिपो की वर्कशॉप में खड़ी बसें। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। कैथल डिपो का रोडवेज बस बेड़ा लगातार सिमटता जा रहा है। पिछले एक वर्ष में 69 बसें निर्धारित 10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने के बाद जर्जर घोषित कर परिचालन से बाहर कर दी गईं। जुलाई माह में चार और बसों के हटने के बाद डिपो में बसों की संख्या घटकर 152 रह गई है। इसका सीधा असर करनाल, कुरुक्षेत्र, जींद, असंध, गुहला-चीका और नरवाना समेत कई प्रमुख रूटों पर दिखाई देने लगा है।

बसों की कमी का सबसे अधिक असर रोजाना सफर करने वाले विद्यार्थियों और स्थानीय यात्रियों पर पड़ रहा है। डिपो रिकॉर्ड के अनुसार अगस्त 2025 से अब तक 69 बसें सेवा अवधि पूरी होने के कारण बेड़े से बाहर हो चुकी हैं। वहीं, डिपो के सुचारु संचालन के लिए करीब 250 बसों की आवश्यकता है।
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वर्तमान में उपलब्ध 152 बसों में विभाग की अपनी बसों के साथ किलोमीटर योजना के तहत संचालित बसें भी शामिल हैं। बसों की लगातार घटती संख्या के कारण कई रूटों पर फेरे प्रभावित हो रहे हैं और यात्रियों को लंबे समय तक बसों का इंतजार करना पड़ रहा है।

बीच रास्ते में खराब हो रहीं बसें, बढ़ रही परेशानी
डिपो की अधिकांश बसें पुरानी होने के कारण उनका संचालन मरम्मत के सहारे किया जा रहा है। तकनीकी खराबी के चलते कई बार बसें बीच रास्ते में ही बंद हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। यात्री मनराज, सूरजभान और रामनिवास सिंह ने बताया कि जर्जर बसों में सफर करना उनकी मजबूरी बन गया है। उन्होंने सरकार से जल्द नई बसें उपलब्ध कराने की मांग की।

बसों की कमी से रोडवेज की आय पर भी असर
बसों की संख्या घटने का असर रोडवेज की आय पर भी पड़ा है। अधिकारियों के अनुसार पहले डिपो की दैनिक आय करीब 18 लाख रुपये थी, जो अब घटकर लगभग 16 लाख रुपये रह गई है। कैथल डिपो की बसों से प्रतिदिन करीब 20 हजार यात्री सफर करते हैं।

कर्मचारी नेता ने उठाई नई बसों की मांग
रोडवेज कर्मचारी नेता कृष्ण कुमार ने कहा कि प्रदेशभर में रोडवेज का बस बेड़ा लगातार घट रहा है। कैथल डिपो की अधिकांश बसें पुरानी हो चुकी हैं और हर महीने कई बसें सेवा से बाहर हो रही हैं। उन्होंने सरकार से जल्द नई बसें उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके और विभाग की आय में भी बढ़ोतरी हो।
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तकनीकी जांच के बाद ही हटाई जाती हैं बसें
10 वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने वाली बसों का अंतिम निरीक्षण रोडवेज मुख्यालय की तकनीकी टीम करती है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही बसों को जर्जर घोषित कर परिचालन से हटाया जाता है। फिलहाल नई बसों की उपलब्धता को लेकर कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं है।

वर्जन

नई बसों को लेकर मुख्यालय को लिखा हुआ है। डिपो में जल्द नई बसें आने की उम्मीद है। यात्रियों को रूटों पर परेशानी नहीं आने दी जा रही है।

अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर कैथल
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