संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु वाईके बहल की देखरेख में शनिवार को न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें रखे गए कुल 9413 मुकदमों में से 6281 मामलों को सुलह-समझौते से निपटा गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रितु ने बताया कि मुबलिक सात करोड़ 42 लाख 63 हजार 592 रुपये की राशि के विभिन्न आपराधिक, एनआईएक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन, श्रम से संबंधित विवाद मामले, राजस्व मामले व अन्य मामलों का इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से निपटारा किया गया।
इस लोक अदालत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश अमित गर्ग, पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायधीश देवेंद्र सिंह, सिविल न्यायाधीश (सिनियर डिवीजन) डाॅ. अमन इंद्र सिंह, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) संदीप कौर, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) अंकिता महाजन और सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) गुहला डिविजन राजविन्द्र सिंह की बेंच गठित की गई थी।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रितु ने बताया कि लोक अदालत एक ऐसी अदालत है जिसमें मामलों (विवादों) का निपटारा पक्षकारों की पारस्परिक सहमति से किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इसमें न किसी पक्षकार की जीत होती न हार। दोनों पक्षों में पुनः स्नेह, सौहार्द एवं बंधुत्व का भाव उत्पन्न हो जाता है। लोक अदालत की विशेषता है कि यह शीघ्र व सस्ते न्याय का स्रोत है। इसे जनता की अदालत भी कहा जाता है।
लोक अदालत की विशेषता है कि इसमें कोई न्यायालय शुल्क नहीं है और यदि न्यायालय शुल्क का भुगतान पहले ही कर दिया गया है तो लोक अदालत में विवाद का निपटारा होने पर इसे वापिस कर दिया जाता है। लोक अदालत में मामले का निपटारा तुरंत हो जाता है और सभी को न्याय आसानी से मिल जाता है।