रात भर चला पुलिस थाने में हाई वोल्टेज ड्रामा, कभी सभी आप कार्यकर्ताओं को लिया हिरासत में तो कभी छोड़ा
- शहीद राजेश पूनिया के परिवार को एक करोड़ दिलवाने सहित सीएम से 5 सवाल पूछने का मामला
- पुलिस के लिए गले का फांस बना मुख्यमंत्री को काला बैनर दिखाने का प्रयास करने का आरोपी सुखबीर चहल
- जब नहीं माने धरना देने से कार्यकर्ता तो पुलिस ने थाने के बाहर से खदेड़ा, रात एक बजे लघु सचिवालय में भी दिया एक घंटे तक धरना, सुबह फिर किया प्रदर्शन
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मुख्यमंत्री मनोहर लाल से भागल के शहीद राजेश पूनिया को एक करोड़ रुपये की मदद देने सहित 5 साल पूछने का प्रयास करते हिरासत में लिए गए आम आदमी पार्टी के लोकसभा संगठन मंत्री सुखबीर चहल की हिरासत पुलिस के लिए वीरवार रात गले का फांस बन गई। पुलिस को न तो सुखबीर को छोड़ते बन और न ही देर रात तक हिरासत में रखे बना। आखिरकार थाना शहर से दूसरी जगह ले जाकर आम आदमी पार्टी के रोष को खत्म करवाना पड़ा। रात करीब ढाई बजे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला। जिसमें कभी पुलिसकर्मी चिल्लाते नजर आए तो कभी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता पुलिस कर्मियों पर झल्लाते नजर आए।
दरअसल सुखबीर चहल को पुलिस ने वीरवार दिन में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के रोड शो के दौरान शाह अस्पताल के निकट से हिरासत में लिया था। उस समय सीएम का काफिला 500 मीटर की दूरी पर था। जबकि सुखबीर स्वागत द्वार के अंदर घुसा हुआ था। उसके काले बैनर को पुलिस ने देख लिया और हिरासत में ले लिया। देर रात तक जब उसे रिहा नहीं किया गया तो आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष मुकेश गर्ग, प्रदीप कुराड़, रघुबीर हाबड़ी, शोएब आलम, राजू कांगड़ा, विकास तंवर, रामकुमार, सुनील, मेजर सिंह, जितेंद्र, अरुण सहित दर्जन भर कार्यकर्ताओं ने रोष शुरू कर दिया। करीब साढ़े दस बजे ये कार्यकर्ता थाना शहर के बाहर रजाई व बिस्तर लेकर धरने पर बैठ गए।
सूचना मिलते ही डीएसपी रामकुमार पहुंचे और कहा कि वे ड्यूटी में व्यस्त थे। वे निजी तौर पर 107/51 की धारा में जमानत लेकर सुखबीर को रिहा करने का प्रस्ताव रखा। लेकिन सुखबीर सहित बाहर धरना दे रहे सभी ने रात को जमानत लेने से इंकार कर दिया और कहा कि वे सुबह जमानत लेंगे। तब तक थाना शहर के बाहर धरना देंगे। जिस पर डीएसपी रामकुमार ने उन्हें कहा कि वे धरना क्यों देंगे? जब हिरासत में लिए गए युवक को रिहा किया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने कहा कि यदि सभी को गिरफ्तारी देनी है तो सभी को गिरफ्तार करके रिहा कर देते हैं। इसके बाद सभी ने गिरफ्तारी का प्रस्ताव दे दिया। इसके बाद सभी थाने के अंदर चले गए। करीब 20 मिनट बाद फिर से सभी कार्यकर्ता बाहर आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच सुखबीर के चिल्लाने की आवाज पर सभी कार्यकर्ता फिर से थाने के बाहर जोर-जोर से नारेबाजी करने लगे। जिस पर पुलिस के आधा दर्जन से अधिक जवान डंडे लेकर कार्यकर्ताओं के पीछे दौड़ पड़े और उन्हें कमेटी चौक तक खदेड़ दिया। बाद में पुलिस गाड़ी में बैठाकर हिरासत में लिए गए सुखबीर चहल को अज्ञात स्थान पर ले गई। तब दर्जन भर आम आदमी कार्यकर्ता पैदल ही थाना शहर से लघु सचिवालय पहुंचे। यहां उन्होंने घंटा भर धरना दिया और 2 बजे के बाद घरों को लौट गए।
सुबह फिर से कार्यकर्ता जवाहर पार्क में एकत्रित हुए और प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। जहां डीडीपीओ कार्यालय से सुखबीर चहल की जमानत के बाद फिर से प्रदर्शन करते हुए कार्यकर्ता पिहोवा चौक पर पहुंचे। यहां उन्होंने सरकार के खिलाफ पुतला जलाकर रोष प्रकट किया।
इंजीनियर सुखबीर सिंह ने रिहाई के बाद कहा कि आगे भी उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनकी मांग है कि शहीद राजेश पूनिया के परिजनों को आर्थिक मदद दी जाए। किसानों के कर्ज माफ किए जाएं, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए। महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को बंद किया जाए और भाजपा अपने रोजगार देने के वादे को पूरा करे।