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जाहरवीर गोगा पर वार्षिक मेले में उमड़ी भीड़, श्रद्धालुओं ने छड़ी चढ़ा मांगी मन्नतें

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श्रद्धालुओं ने छड़ी चढ़ा मांगी मन्नतें
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जाहरवीर गोगा पर वार्षिक मेले में उमड़ी भीड़
फोटो नंबर-36
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। जाहरवीर गोगा का कलायत में लगने वाला वार्षिक मेला धूमधाम से संपन्न हुआ। सुबह से ही मेला स्थल पर छोटी-छोटी दुकानें सजना शुरू हो गई थी, जिन पर पूरा दिन खरीददारों की भीड़ लगी रही। प्रबंध समिति द्वारा गोगा माड़ी स्थल को विशेष तौर पर सजाया हुआ था। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसका भी विशेष प्रबंध किया हुआ था। आज सुबह से ही हर जाति व वर्ग की महिलाओं ने गोगा माड़ी पर पहुंच कर पूजा अर्चना करनी शुरू कर दी थी। प्रबंधन समिति के सदस्यों ने मेले में हर प्रकार के व्यापक प्रबंधक किए हुए थे। मेले की विशेष बात यह है कि इस दिन मजार पर लाई जाने वाली छडिय़ों की विशेष तौर से पूजा अर्चना की जाती है। पूर्व में छडिय़ों को लाने का सिलसिला देर सांय शुरू होता था पर गत वर्ष की भांति इस बार भी दोपहर के समय ही छडिय़ां पूजा स्थल पर लाई गई थी ताकि महिलाओं को देरी के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े। छड़ी के पूजा स्थल पर पहुंचने के साथ ही सबसे पहले गुरु गोरख नाथ जी की पूजा अर्चना की जाती है जिसके पश्चात छड़ी का दूसरे स्थलों पर शीश नवा श्रद्धालुओं के लिए पूजा अर्चना करने हेतु स्थापित कर दिया जाता है। मेले में लोगों का सुबह से ही आना शुरू हो गया था जो कि देर सांय तक चलता रहा। शाम के समय तो भीड़ का आलम यह था कि रेलवे रोड पर जाम जैसी स्थिति बनी हुई थी। श्रद्धालुओं ने छडियों के साथ गुरू गोरख नाथ व परिसर में स्थापित अन्य देवी देवताओं की पूजा अर्चना की।
दंडवत कर धामक स्थल पर पहुंचे दर्जनों श्रद्धालु:-
छडियों के मेले में श्रद्धालु दंडवत कर पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचे। इस बार विशेष बात यह रही की इस बार दंडवत कर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बहुत ज्यादा रही। इसमें युवाओं व बच्चों के साथ महिलाएं भी शामिल थी। छडिय़ों के साथ महिलाएं नाचती हुई चल रही थीं।
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भाद्रपद मास की शुक्ल सप्तमी को लगता है मेला:-
जाहरवीर गोगा समिति के प्रधान कदम ङ्क्षसह राणा, मोहन राणा, सुरेंद्र ङ्क्षसह, सोमनाथ, रवींद्र राणा, जोनी राणा, निर्मल राणा, सत्यवान तथा बिरमपाल राणा आदि ने बताया कि हर साल भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष सप्तमी को कलायत में जाहरवीर गोगा पीर का वार्षिक मेला लगता है। मेले में छडिय़ों की विशेष पूजा होती है। कुछ श्रद्धालु नंगे पांव आकर भी पूजा अर्चना करते हैं तथा छड़ी भी चढ़ाते हैं। कलायत के हर घर से सप्तमी के दिन गोगा पीर पर प्रशाद चढ़ा कर पूजा करने के लिए लोग आते हैं। जाहर वीर गोगा सभी धर्मों में पूजे जाते है। कहीं उनको जनमेजय अवतार माना जाता है तो कहीं माना जाता है कि गुरु गोरखनाथ ने उन्हें अधर्म की समाप्ति के लिए सांपों की सेना दी थी। इसीलिए उनके पूजा स्थल पर सांपों के चित्र बनाए जाते है। हिन्दू धर्म में उन्हें गोगा गुरु तो मुस्लिम धर्म में उन्हें गोगा पीर कहा जाता है। राजस्थान में जहां उन्हें बागड़ वाला कहा जाता है तो कहीं पर उन्हें प्रसाद रूपी गुगल से जन्म होने के कारण गोगाल वीर भी कहा जाता है। उनकी यादगार को कायम रखने के लिए कलायत में भी छडिय़ों के नाम से मशहूर यह मेला पूरी उमंग व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
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