संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने और टीबी मुक्त अभियान को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग को जल्द ही 6 अत्याधुनिक ट्रू-नॉट मशीनें मिलने जा रही हैं। इन मशीनों के आने से टीबी जांच का दायरा बढ़ेगा और
मरीजों को रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ट्रू-नॉट मशीनें स्वदेशी चिप-आधारित रियल-टाइम पीसीआर तकनीक पर आधारित हैं। ये पोर्टेबल मशीनें हैं, जिनमें बिजली बैकअप की सुविधा भी होती है, जिससे इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर भी आसानी से संचालित किया जा सकता है। इनकी खासियत है कि ये बेहद सटीक और विश्वसनीय परिणाम देती हैं, जो पहले केवल बड़े शहरों की प्रयोगशालाओं में ही संभव थे।
टीबी के संदिग्ध मरीजों के लिए जांच रिपोर्ट में देरी एक बड़ी समस्या रही है। पारंपरिक बलगम जांच में कई बार सटीक परिणाम नहीं मिल पाते थे, जबकि ट्रू-नाट मशीन कुछ ही घंटों में रिपोर्ट उपलब्ध करा देती है। इससे डॉक्टर तुरंत उपचार शुरू कर सकेंगे और संक्रमण के फैलाव को भी रोका जा सकेगा।
अब तक कई मरीजों को एडवांस जांच के लिए जिला अस्पताल या निजी लैब्स के चक्कर लगाने पड़ते थे। नई मशीनों को ब्लॉक स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थापित किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर ही जांच सुविधा उपलब्ध होगी। इससे मरीजों का समय और खर्च दोनों बचेंगे। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य टीबी को जड़ से खत्म करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी की जल्द पहचान से संक्रमण फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। ऐसे में ये मशीनें टीबी नियंत्रण अभियान में मील का पत्थर साबित होंगी।
मशीनों के संचालन के लिए लैब टेक्नीशियनों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद इन्हें आम जनता के लिए शुरू कर दिया जाएगा।
सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने बताया कि जिले में छह नई ट्रू-नॉट मशीनें आने से टीबी जांच और अधिक सरल व तेज हो जाएगी। जल्द रिपोर्ट मिल सकेगी, जिससे उपचार में भी तेजी आएगी।