कैथल। जिले में एचआईवी संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2023 से लेकर अब तक जिले में कुल 598 एचआईवी पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं। इंजेक्शन से नशा करने वालों की संख्या ज्यादा रही। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार गांव-गांव और शहरी क्षेत्रों में स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है, ताकि संक्रमित मरीजों की समय रहते पहचान कर उनका उपचार शुरू किया जा सके।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में 38,600 लोगों की जांच में 270 मरीज पॉजिटिव मिले, जबकि 2024 में 40,900 जांचों में 200 मरीज सामने आए। वहीं अप्रैल 2025 से लेकर अब तक 26,000 लोगों की जांच में 128 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई। विभागीय अधिकारियों के अनुसार एचआईवी संक्रमण के अधिकतर मामले इंजेक्शन के जरिये नशा करने वालों में पाए जा रहे हैं। नशे के आदी लोग एक ही सुईं का बार-बार इस्तेमाल करते हैं जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है। खासकर पूंडरी और गुहला क्षेत्र में ऐसे मामलों की संख्या अधिक पाई गई है। विभाग के अनुसार जिले में कैथल, गुहला, कलायत व पूंडरी में भी आईसीटी सेंटर बनाया गया है। पूंडरी, गुहला क्षेत्र में एचआईवी के मामले ज्यादा हैं, यहां नशे का प्रभाव ज्यादा है।
जिला नागरिक अस्पताल के साथ-साथ सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी जांच हो रही है। पुष्टि होने के बाद नागरिक अस्पताल में खोले गए एआरटी सेंटर में मरीजों की काउंसलिंग कर दवाई दी जाती है। वहीं विभाग की तरफ से इसके लिए 1097 हेल्पलाइन नंबर भी बनाया गया है। इस नंबर के माध्यम से संबंधित बीमारी की जानकारी ले सकते हैं।
मरीजों को मिल रही आर्थिक सहायता
एचआईवी संक्रमित मरीजों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। जो मरीज एआरटी सेंटर में नियमित उपचार लेते हैं, उन्हें प्रति माह 2,250 रुपये दिए जाते हैं। वर्ष 2023 से 2024 के दौरान लगभग 800 मरीजों को कुल 4 करोड़ 74 लाख 34 हजार 500 रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है।
सहायता लेने के लिए यह होना जरूरी
इस सहायता के लिए मरीज का हरियाणा का निवासी होना, एआरटी सेंटर से नियमित इलाज लेना और वार्षिक आय 2 लाख रुपये से कम होना जरूरी है।
एचआईवी फैलने का मुख्य कारण-
-इंजेक्शन से नशा करना, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त या रक्त उत्पाद बढ़ने से, संक्रमित मां से उसके होने वाले बच्चे को
एचआईवी के लक्षण
- तेजी से वजन कम होना।
- थकान महसूस होना।
- मुंह में छाले पड़ना।
- लगातार बुखार होना।
- रात को ज्यादा पसीना आना।
- त्वचा का रंग बदलना।
एचआईवी एड्स से बचाव के लिए अलग से केंद्र बनाया गया है। यहां पहुंचकर कोई भी व्यक्ति इलाज करवा सकता है। इससे बचाव के लिए विभाग लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है। वहीं मरीजों को नि:शुल्क दवाई दी जाती है। इस बीमारी के पीड़ित को 2250 रुपये की राशि भी आर्थिक सहायता के रूप में दी जाती है।
- डॉ. रेनू चावला, सीएमओ।