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प्रौढ़ शिक्षा में नियुक्त 540 प्रेरकों की छुट्टी..

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प्रौढ़ शिक्षा में नियुक्त 540 प्रेरकों की छुट्टी
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सरकार ने प्रौढ़ शिक्षा के लिए गांवों में नियुक्त प्रेरकों को तुरंत प्रभाव से हटा दिया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 2-2 प्रेरक नियुक्त थे, जिन्हें 2 हजार रुपये प्रति माह मिल रहे थे। प्रेरकों ने इस फैसले पर रोष जताया है। सरकार द्वारा जारी पत्र के अनुसार केंद्र से बजट न मिलने के कारण इन प्रेरकों को 6 जून से तुरंत प्रभाव से हटाते हुए पूरा रिकॉर्ड बीडीपीओ कार्यालय द्वारा कब्जे में लेने के आदेश दिए गए हैं।
साक्षर भारत मिशन के तहत जिले के 270 गांवों के लिए 540 प्रेरकों को वर्ष 2012 में नियुक्ति दी गई थी। लेकिन पांच साल पूरे होने के बाद जिले के सभी प्रेरकों को हटा दिया गया है। जिले के छह ब्लाकों में से सीवन में कुल 90, गुहला में 122, कैथल में 128, कलायत में 56, पूंडरी में 88 व राजौंद में 52 प्रेरक बुजुर्गों को प्राथमिक शिक्षा देने के लिए कार्यरत थे। जिन्होंने पिछले पांच सालों में कार्य के माध्यम से 1 लाख 2 हजार बुजुर्गों को अक्षर ज्ञान दिया है। जबकि इसका लक्ष्य एक लाख 80 हजार बुुजुर्गों को शिक्षित करने का था। प्रदेश में जिला कैथल अन्य दस जिलों में पहले स्थान पर है।
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अब अक्षर ज्ञान देने वाला कोई नहीं
गांव हरनौला की बुजुर्ग महिला महेंद्र कौर ने बताया कि सरकार का उद्देश्य था कि गांव का कोई बुजुर्ग अंगूठा टेक न रहे और उसे अक्षर ज्ञान मिल सके। लेकिन प्रेरकों को हटाए जाने के बाद अब उन्हें अक्षर ज्ञान नहीं मिल सकेगा।
पहले जारी किया पत्र, बाद में हटाया
प्रेरकों की छुट्टी के बाद अब अन्य अध्यापक बुजुर्गों को शिक्षित करने के लिए नहीं बचे है। प्रेरकों ने सरकार पर उन्हें बरगलाने का आरोप भी लगाया है। गांव हरनौला निवासी प्रेरक मनजीत ने बताया कि सरकार ने इस योजना के तहत कक्षा तीसरी के स्तर पर बुजुर्गों को शिक्षा दी जाती है। यह योजना इस वर्ष की 31 मार्च को पूरी होनी थी। सरकार ने इसे सितंबर तक बढ़ा भी दिया था। लेकिन अचानक सभी प्रेरकों को रिलीव लेटर जारी कर दिया है। कैथल ब्लाक के प्रेरक अनिल ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बुजुर्गों को शिक्षित करने के साथ-साथ अन्य सरकारी योजनाओं को भी जन-जन तक पहुंचाया है। अब वह अपनी नौकरी बचाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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साक्षर भारत मिशन के तहत प्रेरकों को कांट्रेक्ट पर लगाया गया था। उनका कांट्रेक्ट 31 मार्च को खत्म हो गया है। इसलिए वे कार्यमुक्त हो गए हैं। पहले सरकार ने 30 सितंबर के लिए उनके कांट्रेक्ट को बढ़ाया भी था। लेकिन फिर से उन्हें रद कर दिया गया है। इन्हें सरकार ने अपना कर्मचारी नियुक्त नहीं किया था।
कैप्टन शक्ति सिंह, एडीसी, कैथल।
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