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जिले में सिसक रही है एंबुलेंस सेवा

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जिले में सिसक रही है एंबुलेंस सेवा
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिले में करीब 11 लाख से अधिक जनसंख्या पर केवल 11 एंबुलेंस हैं। एंबुलेंस के अभाव में कई बार सड़क पर ही जिंदगी दम तोड़ रही है। करीब 6 गाड़ियां अभी कंडम हालत में हैं। इसके बावजूद विभाग का इस ओर ध्यान नहीं हैं। जैसे-तैसे 102 सेवा चल रही है।

कुल 11 एंबुलेंस, 6 की आयु पूरी
जिले में कुल 11 में से 6 एंबुलेंस तीन लाख किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुकी हैं। 11 एंबुलेंस में से दो से तीन एंबुलेंस मेंटेनेंस के लिए खड़ी रहती हैं। इस तरह से 102 पर आने वाले कॉल पर सहायता कर पाना कई बार मुश्किल हो जाता है।
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वेतन के लिए तरस रहे हैं 102 सेवा के कर्मचारी
संकट एवं आपदा में लोगों की मदद के लिए काम कर रहे कर्मचारी इस समय वेतन के लिए तरस रहे हैं। उन्हें तीन महीने का वेतन अभी तक नहीं मिला है। जिले से बाहर पीजीआई के लिए प्रतिदिन 6 से 8 मरीज रेफर होते हैं। कर्मचारियों ने बताया कि विभाग ने निर्देश जारी किए थे कि कर्मचारियों की सैलरी प्रति महीने के 7 तारीख तक आएगी। लेकिन तीन-तीन महीने तक वेतन न मिलने के कारण कर्मचारी परेशान हैं। जिले में एंबुलेंस सेवा पर कुल 58 कर्मचारी हैं।

नियमों को ताक पर रखकर चल रही एंबुलेंस
जिले में छह एंबुलेंस ऐसी है जो रोड सुरक्षा नियमों से अधिक चल चुकी है। नियम के अनुसार एक एंबुलेंस ढाई लाख किलोमीटर तक चल सकती है। लेकिन छह एंबुलेंस ढाई लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी है। चार एंबुलेंस तो साढ़े चार लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। जिस कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

रेफर के लिए तीन गाड़ियां, प्रतिदिन होते हैं 6 से 8 रेफर
स्वास्थ्य विभाग के पास पीजीआई में मरीजों को रेफर करने के लिए केवल तीन गाड़ियां है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 1400 से 1800 ओपीडी है। जिनमें प्रतिदिन 6 से 8 मरीज रेफर होते हैं। जबकि उनके पास केवल तीन गाड़ियां रेफर करने के लिए है। कई बार गाड़ी न होने से मरीजों को बाहर से निजी एंबुलेंस लेकर जाना पड़ता है।
इसके अलावा कलायत, गुहला-चीका, पूंडरी सहित कई इलाकों में एंबुलेंस सेवाओं में बढ़ोत्तरी किए जाने की जरूरत है। इन एरिया में भी एंबुलेंस की जरूरत पड़ती रहती है।

नए नियम ने बढ़ाई ओर समस्याएं
एंबुलेंस कर्मचारियों ने बताया कि नए नियम के अनुसार एक एंबुलेंस को तीन हजार रुपये का तेल 24 घंटे के लिए दिया जाएगा। अगर एंबुलेंस चंडीगढ़ पीजीआई चली जाती है, तो उसी तेल के अंदर वह दोबारा चक्कर नहीं लगा सकती है। जिसके कारण रेफर के लिए जाने वाली गाड़ियों के लिए समस्या आ रही है।
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डिप्टी सिविल सर्जन डा. नीलम कक्कड़ का कहना है कि फिलहाल संसाधनों के अनुसार बेहतर सेवाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। जैसे ही नई गाड़ियां मिलेंगी, उन्हें चालू कर दिया जाएगा।
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