कैथल। जिला नागरिक अस्पताल और अन्य प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में चिकित्सकों कमी से मरीजों और ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है। नागरिक अस्पताल में कुल 55 चिकित्सकों की आवश्यकता है जबकि यहां 41 पद रिक्त हैं। हालांकि विभाग के अनुसार अभी आपातकालीन वार्ड में पांच नियमित डॉक्टरों की जरूरत है पर यहां पिछले करीब आठ महीने से सिर्फ दो डॉक्टर की कार्यरत हैं।
डाक्टरों की कर्मी से मरीजों और लोगों को परेशानी हो रही है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के इलाज को लेकर खोले गए 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में से 11 में डाॅक्टर नहीं है। इस कारण यहां पर भी आने वाले लोगों को अपना इलाज करवाने के लिए काफी दिक्कत आ रही है। वहीं, बीमारियों के विशेषज्ञ डाॅक्टर भी इमरजेंसी की ड्यूटी करने को मजबूर हैं। इससे ओपीडी भी प्रभावित हो रही है।
बता दें कि आपातकालीन वार्ड में तैनात दोनों चिकित्सकों पर काम का बोझ काफी अधिक है। यदि इन डॉक्टरों को अवकाश पर जाना होता है तो आपातकालीन वार्ड में सेवाएं देने के लिए सीएचसी और पीएचसी के डॉक्टरों की ड्यूटी लगानी पड़ती है। गौरतलब है आपातकालीन वार्ड में इसी साल की फरवरी में एक डॉक्टर का तबादला हो गया था। इसके बाद से केवल दो डॉक्टरों से ही काम चलाया जा रहा है। जिला अस्पताल में रोजाना 1500 से दो हजार की ओपीडी होती है। ऐसे में इतने मरीजों को इलाज सही ढंग से नहीं दिया जा सकता है
पिछले दिनों ही जिला परिषद की बैठक में पार्षदों ने गांवों में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डाक्टर व नर्सों की कमी की बात रखी थी। उस समय बैठक में मौजूद डिप्टी सिविल सर्जन डाॅ. विकास धवन ने बताया था कि जिले के लिए चिकित्सकों के 142 पद स्वीकृत हैं, तैनाती सिर्फ 49 की ही है। जिला नागरिक अस्पताल में एक भी महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है, ऐसे में डिलीवरी के लिए प्राइवेट अस्पताल से महिला रोग विशेषज्ञ को बुलाना पड़ता है। डाक्टरों की कमी से मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ता है। संवाद