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36 घंटों में 40 हजार महिलाओं ने किया निशुल्क सफर

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रक्षाबंधन के दिन बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा के चलते भारी संख्या में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। बहनों ने अपने भाइयों के यहां पहुंच कर उनकी कलाई पर प्यार का धागा बांधा। शनिवार दोपहर 12 बजे से लेकर रविवार रात्रि 12 बजे तक जारी रही। 36 घंटों में लगभग 40 हजार महिला यात्रियों ने बसों में निशुल्क सफर तय किया।
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बता दें कि रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा के लिए रविवार सुबह से ही बस स्टैंड पर महिलाओं की भीड़ उमड़ी रही। दिनभर बस स्टैंड पर यात्रियों की गहमागहमी रही। जिन रूटों की सवारी ज्यादा थी, उन पर बसों के चार-चार अतिरिक्त चक्कर लगवाए गए। करनाल, जींद, कुरुक्षेत्र और चीका के रूटों पर ज्यादा बसें चलाई गई। भीड़ से महिलाएं परेशान तो दिखीं, लेकिन मुफ्त के चक्कर में बसों में यात्रा भी की। कैथल डिपो में 107 रोडवेज और किलोमीटर की बसें हैं, जिनमें से सामान्य दिनों में 85 से 90 बसें ही रूटों पर चलती थी। रक्षाबंधन को लेकर 107 बसें चलाई गईं। 107 सरकारी बसों के साथ 113 प्राइवेट बसों में भी बच्चे और महिलाओं ने निशुल्क यात्रा की। रक्षाबंधन को लेकर सभी रोडवेज कर्मचारियों की छुट्टी भी रद्द की हुई थी। रोडवेज के 206 चालक व 267 परिचालक सहित अन्य कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद रहे।
लंबे रूटों के लिए महिलाओं को करना पड़ा इंतजार
रक्षाबंधन पर्व पर सरकार की तरफ से शुरू की गई बस सुविधा के चलते महिलाओं को लंबे रूट हिसार, चंडीगढ़, सिरसा सहित कई रूटों पर बसों के लिए कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ा। इन बसों में चढ़ने के लिए महिलाएं धक्का-मुक्की का शिकार हुई। इन रूटों के लिए जैसे ही बसें बस स्टैंड पर आकर रुकी तो महिलाएं बसों की ओर दौड़ती नजर आई। लंबे रूटों की बसें पहले से सवारियों से खचाखच भरी नजर आई। इसके अलावा लोकल रूटों पर परिवहन समिति और रोडवेज बसों की भरभार रही। यहां यात्रियों को किसी प्रकार की समस्या नहीं हुई। हर दस मिनट के बाद यात्रियों को बसें मिलती रहीं।
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बस अड्डे पर महिला सुरक्षा कर्मियों की कमी महसूस हुई। हिसार निवासी महिला कमलेश ने बताया कि वह कैथल उसके मायके के यहां आई हुई थी। बस स्टैंड पर एक युवक द्वारा उसके थैले के साथ छेड़खानी की गई। इसके बाद उक्त महिला ने पुलिस से संपर्क साधने का प्रयास किया लेकिन इसके बाद वे अपने गंतव्य स्थान पर चली गई। उधर, हिसार जा रही रोडवेज बस के परिचालक के बैग से पैसे चुराते हुए एक व्यक्ति को पकड़ा गया। जिससे 400 रुपये मौके पर ही बरामद किए गए। इसके बाद रोडवेज के कर्मचारियों ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
कैथल से पूंडरी जा रही महिला यात्री रामभतेरी ने बताया कि बसों में मुफ्त सुविधा तो थी, लेकिन भीड़ भी बहुत थी। महिला सुरक्षा को लेकर कोई प्रबंध किया जाना चाहिए था, ताकि महिलाओं को समस्या का सामना न करना पड़े।
जींद से कुरुक्षेत्र महिला यात्री परमजीत कौर ने बताया कि महिलाओं के लिए निशुल्क यात्रा दिए जाने की योजना सही। लेकिन यहां महिलाओं के साथ कोई अप्रिय घटना न घटे इसके लिए महिला पुलिसकर्मी भी तैनात किए जाने चाहिए।
निशुल्क सीट को लेकर आपस में भिड़ी महिलाएं
रक्षाबंधन पर महिलाओं के लिए निशुल्क बस सेवा मौजूद रही। लंबे रूटों पर महिलाओं को सीट नंबर भी दिया गया। लेकिन कुछ महिलाएं सीट के लिए आपस में भिड़ गईं। उसके बाद कर्मचारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर मामला शांत करवाया गया।
कोविड को लेकर दिखी लापरवाही
मुफ्त यात्रा का फायदा कोरोना संक्रमण को बढ़ावा दे सकता है। क्योंकि बसों में भीड़ इतनी ज्यादा उमड़ी रही कि उनमें पांव रखने तक की जगह नहीं बची। महिलाएं, बच्चे सभी एक दूसरे से सट कर खड़े दिखे। बस में सफर करने वाले यात्रियों ने चेहरों पर मास्क भी नहीं लगाए हुए थे। इससे यात्रियों ने कोविड-19 के नियमों को तोड़कर लापरवाही करते दिखे।
त्योहार के चलते बढ़ती भीड़ को देखते हुए विभाग द्वारा एक टीम का गठन किया गया। जो हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे। संस्थान प्रबंधक रोहताश जांगड़ा, इंस्पेक्टर नफे सिंह, निरंजन, चालक कृष्ण, डीआई आनंद शर्मा और रमेश को विशेष रूप से बस स्टैंड पर तैनात किया गया था।
महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बस अड्डा परिसर का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कर्मचारियों से यात्रियों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में सवाल-जवाब किए। उन्होंने कहा कि विभाग के आदेशानुसार महिलाओं के लिए निशुल्क यात्रा का प्रावधान किया गया। शनिवार दोपहर बाद से सुविधा शुरू हुई रविवार रात 12 बजे तक शांतिप्रिय तरीके से संपन्न हुई।
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