संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कैलरम गांव में ग्रामीणों ने एकजुटता और समझदारी का परिचय देते हुए पंचायती जमीन से कब्जे हटाने की अनूठी मिसाल पेश की है। सोमवार को पूरे गांव की सहभागिता से शांतिपूर्ण तरीके से करीब 40 एकड़ पंचायती भूमि को कब्जामुक्त कराया गया। गांव में लगभग 10 से 12 अलग-अलग स्थानों पर पंचायत की जमीन पर कब्जे थे। इन जमीनों पर गांव के लोगों के कब्जे थे। इनमें वे खेती करते थे।
गांव में विकास कार्यों को गति देने और स्थायी मंडी और स्टेडियम बनाने के मकसद से ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से जो कब्जे किए हुए थे, वे छोड़ दिए। प्रशासनिक निशानदेही के बाद ग्रामीणों ने स्वयं आगे आकर यह सामाजिक निर्णय लिया। इस प्रकार बिना किसी विवाद के इन जमीनों को खाली करा लिया गया। अब ये जमीन ग्राम पंचायत के अधीन हो गई हैं। इससे होने वाली आमदनी को गांव के विकास में खर्च किया जाएगा। इस दौरान सरपंच प्रतिनिधि नरेश कुमार, पूर्व सरपंच अजमेर, पवन कुमार, नाथू राम, बीरबल आदि लोग मौजूद रहे।
गौरतलब है कि कैलरम गांव में स्टेडियम और अस्थायी खरीद केंद्र को लेकर मार्च में विवाद भी गहराया गया था। बाद में गांव के सरपंच प्रतिनिधि नरेश कुमार की पहल से गेहूं खरीद के लिए अलग स्थान चिह्नित कर दिया गया है, जिससे दोनों पक्षों में सहमति बन गई। युवाओं ने अस्थायी तौर पर बनाए गए कर्दम ऋषि स्टेडियम को यथावत रखने की मांग उठाई थी।
स्टेडियम बचाने के लिए लिया सामूहिक फैसला
दरअसल, हर वर्ष गेहूं सीजन के दौरान गांव के युवाओं द्वारा तैयार किए गए खेल स्टेडियम को अस्थायी अनाज मंडी में बदल दिया जाता था, जिससे खिलाड़ियों की तैयारी प्रभावित होती थी। इस बार युवाओं ने पंचायत से आग्रह किया कि स्टेडियम को मंडी के रूप में उपयोग न किया जाए। जब गेहूं खरीद के लिए वैकल्पिक स्थान की समस्या सामने आई, तो ग्रामीणों ने आपसी सहमति से पंचायती जमीन को कब्जामुक्त कराने का फैसला लिया। गांववासियों ने भाईचारे और सकारात्मक सोच का परिचय देते हुए इसे शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न किया, जो क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।