गुरमीत सीड़ा गुहला-चीका। घग्गर नदी की गहराई और चौड़ाई बढ़ाने का वादा न निभाने के कारण गुहला क्षेत्र के ग्रामीणों का राजनीतिक दलों के नेताओं से विश्वास उठता जा रहा है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि ये गुहला से लेकर दिल्ली तक के नेताओं से गुहार ला चुके हैं। फिर भी केवल आश्वासन मिले समाधान नहीं हो रहा।
हर साल बारिश के सीजन में इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाली घग्गर नदी में बाढ़ का खतरा मंडराता रहता है। किसानों का कहना है कि वर्ष 2023 के दौरान घग्गर नदी में लगभग 45 हजार 403 क्यूसेक पानी का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। सरौला गांव के पास घग्गर नदी के पानी की निकासी के लिए बनाए गए साइफन की क्षमता कई हजार क्यूसेक पानी की है।
इसके चलते सौगलपुर व सींह गांव के पास आकर मारकंडा नदी व घग्गर नदी का संगम होता है इस से लेकर पंजाब से सटा गांव भाटिया तक घग्गर नदी के दोनों तरफ के करीब 35 गांवों के लोगों की मुसीबत बढ़ गई थी। क्षेत्र के लोगों ने आपसी भाईचारे की मिसाल कायम करते हुए दिन-रात निगरानी करके और उचित प्रबंध करके इस क्षेत्र में घग्गर नदी को टूटने से बचाने की भरपूर कोशिश की थी।
किसानों का कहना है कि ऐसे हालात हर साल बनते हैं और हर साल नेता समाधान का वादा करते हैं, लेकिन मिलता कुछ नहीं। नाराज किसानों का कहना है कि गुहला से लेकर दिल्ली तक के नेताओं से इस मुद्दे को सुलझाने की अपील की, लेकिन वादों के अलावा उनको कुछ नहीं मिला है। आज तक प्रशासन ने घग्गर नदी की दोबारा सुधि नहीं ली।
किसानों ने कहा कि कर्मचारी अधिकारी सिर्फ कागजातों में ही घग्गर नदी को पक्का कर देते हैं। बाढ़ में गुहला क्षेत्र में इनेलो सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने भी घग्गर नदी का दौरा कर सरकार से बाढ़ से बचने के लिए आवाज उठाई थी परंतु सरकार व प्रशासन ने आज तक घग्गर की तरफ आंख उठा कर भी नहीं देखा। संवाद
घग्गर नदी में डाला जा रहा दूषित पानी, किसान परेशान
आसपास के गांव व शहरों से सिधा सीवर का दूषित पानी घग्गर नदी में डाला जा रहा है। जबकि पानी को साफ करके उन्हें नदियों में डाला ना चाहिए लेकिन इस पर कोई विचार नहीं किया जाता है। किसान काफी समय से इस समस्या से परेशन है गंदे पानी की वजह से आस पास के इलाकों के किसानों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। सरकार की समय रहते घग्गर नदी से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना चाहिए ताकि हर वर्ष होने वाले बाढ़ के खतरे से बचा सके। -केवल सदरहेडी, भाकियू चढूनी जिला उपाध्यक्ष।
चढूनी ने सरकार से भी की थी चौड़ाई बढ़ाने की मांग
घग्गर नदी के स्थायी समाधान के लिए धार को 200 फीट चौड़ा और करीब 30 फीट गहरा बन जाने नदी के किनारों को मजबूत करने और सरौला हेड की सफाई करने और साइफन को बड़ा करने, घग्गर नदी को खोदने की मांग उसे समय की भाजपा जजपा सरकार से की थी, लेकिन आज तक नेताओं ने वादों के सिवा कुछ नहीं दिया है। पूर्व की गठबंधन सरकार ने समस्या का समाधान करने का वादा किया था, मगर समस्या अभी तक ज्यों की त्यों पड़ी है। -जरनैल सिंह जैली, नेता, भाकियू चढूनी गुट
घग्गर नदी के संदर्भ में नहीं हो रही कोई सुनवाई
घग्गर नदी की अनेक समस्याओं पर अगर समय रहते विचार करके समाधान नहीं किया गया तो गुहला क्षेत्र में बड़ा नुकसान हो सकता है। आज भी किसान घग्गर नदी के संदर्भ में अनेक मांग कर रहे हैं मगर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। घग्गर नदी के एरिया को सरकार ने डार्क जोन में घोषित किया हुआ है। नदी की धार की खुदाई हो तो पानी का लेवल भी ऊपर आ सकता है। -हरजिंदर नंबरदार, सीड़ा तोमर खाप प्रवक्ता।