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तितरम मोड से अंबाला तक चल रहे नेशनल हाइवे के निर्माण के बाद ही कम हो पाएंगे हादसे

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तितरम मोड़ से अंबाला तक चल रहे नेशनल हाइवे के निर्माण के बाद ही कम हो पाएंगे हादसे
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कैथल से करीब 7 किलोमीटर तक तक काफी तंग है नेशनल हाइवे
एचसीटीएम के पास हो चुके हैं पहले भी कई हादसे, लाइटों की नहीं है व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। खूनी सड़क से जानी जाने वाली कैथल-अंबाला सड़क पर हादसे अभी भी जारी हैं। यह हादसा भी कैथल से डीपीएस स्कूल के मोड़ तक तंग सड़क पर ही हुआ है। इस क्षेत्र में यह सड़क काफी तंग है। अभी तितरम मोड़ से पिहोवा तक के नेशनल हाइवे के टुकड़े का निर्माण कार्य जारी है। तीन गांवों के जमीन विवाद के चलते इसके निर्माण कार्य में देर हो सकती है। फिलहाल पिहोवा तक करीब 70 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। यह फोरलेन हो चुकी है।
कैथल में तितरम मोड़ से शुरू होकर बाईपास गांव क्योड़क से पहले डीपीएस स्कूल के निकट इस सड़क पर मिलता है। इससे पूर्व का करीब 7 किलोमीटर की सड़क काफी तंग है। पहले इस मार्ग को खूनी सड़क के नाम से ही जाना जाने लगा था। लोगों की लंबी मांग के बाद इस मार्ग का पुनर्निर्माण हो रहा है। यह निर्माण कार्य पूरा होगा तभी इन हादसों से निजात मिल सकेगी।
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लाइटों की व्यवस्था ना होना भी हादसे का एक कारण : नेशनल हाइवे होने के बावजूद इस मार्ग पर लाइटों की कोई व्यवस्था नहीं है। जिस कारण अंधेरे के चलते भी यह हादसा हुआ है।
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ओवरलोडेड वाहनों पर नहीं है कोई नियंत्रण
शहर में ही नहीं नेशनल हाइवे पर ओवरलोडेड वाहनों के चलते हादसे हो रहे हैं। गैर कानूनी रूप से चल रहे इन वाहनों को रात को ही निकालने का प्रयास किया जाता है। ताकि कोई पूछताछ ना हो। रात को ओवरलोडेड इस ट्राली के कारण ही यह हादसा भी होना बताया जा रहा है। प्रशासन को चाहिए कि इन ओवरलोडेड वाहनों पर अंकुश लगाए।
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