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Kaithal News: राजकीय आईटीआई में घटा दीं 300 सीटें

Sat, 27 Jun 2026 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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राजकीय आईटीआई कैथल का भवन। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग ने राजकीय आईटीआई कैथल में एक वर्ष के भीतर करीब 300 सीटें कम कर दी हैं। पिछले सत्र में जहां 1,200 सीटों पर दाखिले के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, वहीं इस बार केवल 900 सीटों के लिए ही आवेदन लिए जा रहे हैं। विभाग ने रिक्त पड़े इंस्ट्रक्टरों के पद भरने के बजाय दूसरा रास्ता अपनाते हुए उन ट्रेडों और उनकी यूनिटों को ही बंद कर दिया, जहां प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं थे।
विभाग का तर्क है कि यह कदम गुणवत्ता आधारित प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। हालांकि, जिन ट्रेडों को बंद किया गया है, उनमें कई ऐसे कोर्स भी शामिल हैं जो वर्षों से संचालित हो रहे थे और प्रशिक्षकों की कमी के बावजूद उनकी सभी सीटें नियमित रूप से भर जाती थीं।
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सबसे बड़ा झटका फायर टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट ट्रेड को लगा है। यह ट्रेड पिछले आठ वर्षों से आईटीआई में संचालित हो रही थी और इसकी दोनों यूनिटें बंद कर दी गई हैं। यह ट्रेड युवाओं के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय थी, क्योंकि निजी संस्थानों में इसी कोर्स के लिए 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक फीस ली जाती है, जबकि राजकीय आईटीआई में यह प्रशिक्षण लगभग निशुल्क उपलब्ध कराया जाता था।
कैथल आईटीआई में इस ट्रेड के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों से विद्यार्थी दाखिला लेने आते थे। बड़ी औद्योगिक कंपनियों में फायर एंड सेफ्टी अधिकारियों की लगातार मांग रहने के कारण इस डिप्लोमा के बाद युवाओं को आसानी से रोजगार भी मिल जाता था।

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इन ट्रेडों और यूनिटों पर लगा ताला
राजकीय आईटीआई कैथल में फायर टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट की दो यूनिटें पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा सॉयल टेस्टिंग एंड क्रॉप टेक्नीशियन की एक यूनिट (24 सीटें) तथा मल्टीमीडिया एनीमेशन एंड स्पेशल इफेक्ट्स की एक यूनिट (24 सीटें) भी समाप्त कर दी गई है।

स्टेनो इंग्लिश की चार यूनिटों (96 सीटें) में से तीन यूनिटें, यानी 72 सीटें समाप्त कर दी गई हैं। विभाग का कहना है कि इस ट्रेड में केवल एक ही इंस्ट्रक्टर कार्यरत था। इसी प्रकार स्टेनो हिंदी की दो यूनिटों (48 सीटें) में से एक यूनिट बंद कर दी गई है। इसके अलावा जिन अन्य ट्रेडों में इंस्ट्रक्टरों के पद रिक्त थे, उनकी अतिरिक्त यूनिटें भी समाप्त कर दी गई हैं।

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इंस्ट्रक्टरों की ऑनलाइन मैपिंग के बाद लिया गया फैसला
डायरेक्टर जनरल ऑफ ट्रेनिंग (डीजीटी) ने देशभर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कार्यरत इंस्ट्रक्टरों की ऑनलाइन मैपिंग करवाई थी। इसके माध्यम से विभाग को प्रत्येक आईटीआई में ट्रेडवार उपलब्ध इंस्ट्रक्टरों की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिली। इसके बाद विभाग ने ''''क्वालिटी बेस्ड ट्रेनिंग'''' का हवाला देते हुए जिन ट्रेडों में इंस्ट्रक्टर उपलब्ध नहीं थे, उन्हें बंद करने का निर्णय लिया। वहीं जिन ट्रेडों में निर्धारित संख्या से कम इंस्ट्रक्टर थे, उनकी अतिरिक्त यूनिटें भी समाप्त कर दी गईं।

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रोजगारपरक कोर्स की बढ़ी मांग, सीटें घटीं फिर भी पांच गुना आवेदन

राजकीय आईटीआई कैथल में सीटें कम होने के बावजूद उपलब्ध सीटों के मुकाबले अब तक पांच गुना से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जो प्रदेश में सबसे अधिक बताए जा रहे हैं। युवाओं का रुझान अब पारंपरिक स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रियों की बजाय रोजगारपरक डिप्लोमा और तकनीकी कोर्सों की ओर तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि इनमें कम समय में प्रशिक्षण पूरा होने के साथ रोजगार मिलने की संभावना भी अधिक रहती है।

दूसरी ओर, दाखिला प्रक्रिया के दौरान विभाग के ऑनलाइन पोर्टल में पिछले करीब 15 दिनों से तकनीकी दिक्कतें बनी हुई हैं। कई ट्रेड पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रही हैं। माना जा रहा है कि सीटों में कटौती के कारण भी यह स्थिति बनी है। आईटीआई के अधिकारी और इंस्ट्रक्टर अब भी उम्मीद लगाए हुए हैं कि विभाग भारी मांग वाली बंद की गई ट्रेडों को दोबारा शुरू कर सकता है।

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इन ट्रेडों में लिए जा रहे हैं दाखिले

राजकीय आईटीआई कैथल में वर्तमान सत्र के लिए प्लंबर, फीटर, टर्नर, इलेक्ट्रिशियन, वायरमैन, वेल्डर, कारपेंटर, कोपा, डीएमएम, डीएमसी, पेंटर जनरल, इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक, कंप्यूटर हार्डवेयर एंड नेटवर्क मेंटेनेंस, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक, मैकेनिक आरएसी, मोटर मैकेनिक, ट्रैक्टर मैकेनिक, मशीनिस्ट, मशीनिस्ट ग्राइंडर, टूल एंड डाई मेकर, टेक्नीशियन पावर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, स्टेनो हिंदी, स्टेनो अंग्रेजी, सीविंग टेक्नोलॉजी और ड्रेस मेकिंग सहित विभिन्न ट्रेडों में आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।
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वर्जन

कुछ ट्रेडों और उनकी यूनिटों को इंस्ट्रक्टर नहीं होने या निर्धारित संख्या से कम होने के कारण बंद किया गया है। हालांकि, इन ट्रेडों को दोबारा शुरू करने को लेकर विभाग स्तर पर बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि अधिक मांग वाले कोर्स फिर से शुरू किए जाएंगे। पोर्टल पूरी तरह सुचारु होने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। -सतीश मच्छाल, प्राचार्य, राजकीय आईटीआई, कैथल
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