गांव जाखौली में युवक पर हमला करने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बजाय उल्टा उसी के खिलाफ केस दर्ज करने से तंग आकर युवक ने फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक 23 वर्षीय युवक की जेब से एक सुसाइड नोट भी मिला। जिस पर गांव के ही सात आरोपियों के नाम और पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं करने बारे में लिखा गया था। युवक की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने कैथल-असंध मार्ग पर जाम लगा दिया और प्रबंधन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। करीब दो घंटे तक लगातार लगे जाम के बाद डीएसपी दलीप सिंह मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया।
मृतक युवक के चाचा प्रदीप व दीपक ने बताया कि 13 सितंबर को गांव के ही कुछ आरोपियों ने उनके भतीजे बिट्टू पर गंडासी व लाठियों से हमला कर उसे घायल कर दिया था। इस संबंध में बिट्टू ने तितरम थाना में शिकायत दी थी। शिकायत में बिट्टू ने गांव के ही सुनील, सोनू, प्रदीप, ग्यासू, छोटा, सुभी व बंटी हलवाई पर हमला करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए थे। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने हमलावर युवकों पर कार्रवाई करने की बजाय पीड़ित पर ही धारा-326 के तहत मामला दर्ज कर दिया था। वह तभी से मानसिक तौर पर परेशान रहता था। उसने सोमवार को सुबह पांच बजे फांसी का फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। परिजनों द्वारा इस मामले में संबंधित थाना प्रभारी और जांच अधिकारी के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज करने की मांग की है।
मौके पर पहुंचे डीएसपी दलीप सिंह ने जाम लगा रहे मृतक युवक के परिजनों को समझाते हुए कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। डीएसपी ने कहा कि वे इस मामले में निष्पक्ष जांच करवाएंगे। पुलिस पर लगे आरोपों के बारे में उन्होंने कहा कि जिस भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ने मामले की जांच में लापरवाही बरती है उसके खिलाफ भी कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
एसएचओ तितरम राजकुमार का इन आरोपों पर कहना है कि इस मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पर धारा 326 के तहत केस दर्ज किया गया है। मृतक की शिकायत पर दर्ज केस में चार आरोपियों सुनील ऊर्फ मनी, प्रदीप, राकेश व ज्ञयासू को 22 अक्तूबर को गिरफ्तार करके जेल में भेज दिया था। शेष की गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है। वहीं मृतक के खिलाफ दर्ज 326 के मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी भी नहीं हुई है। उसने ऐसे आरोप क्यों लगाए, यह तो नहीं पता। लेकिन पुलिस द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई की गई है।