कलायत। मंडी में सरकारी भाव पर सरसों की खरीददारी न होने पर भारतीय किसान यूनियन की बैैठक अनाज मंडी स्थित किसान भवन में हुई। बैठक की अध्यक्षता ब्लॉक प्रधान जिला राम शिमला ने की।
प्रधान ने कहा कि प्राइवेट कंपनियां किसानों की छह माह की मेहनत से तैयार की गई फसल को औने-पौने दामों में खरीद रही है। सरकार ने सरसों का सरकारी रेट 4200 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है। लेकिन प्राइवेट कंपनियां सरकार से मिलीभगत कर भोले-भाले किसानों को लूटने में लगी हुई। जिससे किसान को बहुत घाटा हो रहा है। प्राइवेट व्यापारी सरसों में बहुत अधिक नमी बताकर सरसों को 3200-3500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव खरीद रहें हैं। जिसे भारतीय किसान यूनियन किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जिस किसान का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हुआ है, उन्हीं की फसल को खरीदा जाएगा। बहुत से किसान अनपढ़ हैं और उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की परिभाषा ही नहीं आती है। जिस किसान को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का ही नहीं पता है वह ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करवा सकता है। बहुत से किसान इस प्रक्रिया से अनभिज्ञ रहें हैं। किसानों को गुमराह कर फसल को लूटा जा रहा है। यह किसानों के साथ धोखा है। किसानों को बीमा पालिसी के तहत मिलने वाले मुआवजा को बैंक पहले ही काट लेता है जो अन्याय है। यदि सरकार ने सरकारी भाव पर खरीद शुरू नहीं करवाई व भारतीय किसान यूनियन की समस्याओं की तरफ ध्यान नहीं दिया तो इसके परिणाम सरकार आगामी लोकसभा चुनाव में भुगतने को तैयार रहें। बैठक में किसानों की फसल सरकारी रेट पर खरीदी जाए, सरसों में नमी की मात्रा 8 से 10 प्रतिशत रखी जाए, बिजली मीटरों को पोलों पर न लगाया जाए, किसानों को फसल का उचित मुआवजा दिलवाया जाए आदि मांगें की गई। इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
सरसों का उचित मूल्य न मिलने पर जताया रोष
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अमर उजाला ब्यूरो