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मटौर की महिलाओं ने मनरेगा योजना के तहत काम न मिलने पर किया प्रदर्शन

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मटौर की महिलाओं ने मनरेगा योजना के तहत काम न मिलने पर किया प्रदर्शन
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फोटो नंबर-38
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। गांव मटौर की महिलाओं ने मनरेगा योजना के तहत काम न दिए जाने को लेकर वीरवार को बीडीपीओ कार्यालय के बाहर पंचायत विभाग के खिलाफ प्रदर्शन कर एसडीएम को ज्ञापन सौंप काम दिए जाने की गुहार लगाई है। रानी, लक्ष्मी, नीलम, मुन्नी, सोनिया, ऊषा, मोनिका, प्रीतम, राजबाला, संतरो, केलो ने बताया कि मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में गरीबों को एक वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटी योजना रोजगार मुहैया करवाना है। जिसमें एक तिहाई काम महिलाओं के लिए आरक्षित है। मनरेगा योजना में जल संरक्षण, खेती के लिए जल की व्यवस्था, तालाब खुदाई, निम्न स्तर पर सिंचाई कार्य, पंचायती जमीन का विकास, साफ-सफाई और दूसरी कार्य शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पंचायत विभाग द्वारा हमें 100 दिन की बजाए एक वर्ष से मात्र 10 से 15 दिन का मनरेगा के तहत काम दिया गया है। किसी को तो एक दिन का काम भी नहीं मिला। ऐसे में आर्थिक तंगी के चलते बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ जीवन का गुजर-बसर करना कठिन हो गया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के अन्तर्गत श्रम करने के इच्छुक परिवार को न्यूनतम मजदूरी पर कम से कम एक सौ दिन का रोजगार दिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द उन्हें मनरेगा योजना के तहत काम दिया जाए।
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कर्मचारियों से ली जाएगी रिपोर्ट: बीडीपीओ
बीडीपीओ रोजी ने बताया कि मनरेगा के तहत किए जाने वाले कार्यों को लेकर पंचायत विभाग सजग है। मटौर गांव की महिलाओं द्वारा काम को लेकर कर्मचारियों से रिपोर्ट ली जाएगी और जल्द ही मनरेगा के तहत
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