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आरकेएसडी कॉलेज प्रबंधक समिति का फरमान

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आरकेएसडी कॉलेज प्रबंधक समिति का फैसला-बिना वर्कलोड व बजट के नियुक्त किए हुए थे कर्मचारी, संस्था के पास वेतन को फंड नहीं
संस्थाओं से निकाले 127 स्टाफ सदस्य, स्कूल के 20 से ज्यादा कर्मचारियों की लिस्ट तैयार
21 कॉलेजियम सदस्यों के कई परिजन भी हटाए, तीन माह बाद वर्कलोड के आधार पर होगी नियुक्ति
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। तीन साल बाद पावर में आई आरकेएसडी संस्थाओं की प्रबंधक समिति ने बड़ा निर्णय लेते हुए 127 टीचिंग व नॉन टीचिंग कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 12 अप्रैल से इन सभी कर्मचारियों को फिलहाल 3 माह के लिए डिस्कंटीन्यू किया गया है। इसके बाद वर्कलोड के हिसाब से कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लिया जाएगा। इनमें 21 कॉलेजियम सदस्यों के परिजन भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि कई कॉलेजियम सदस्य आरकेएसडी संस्थाओं की अलग-अलग प्रधानगी मिलने की उम्मीद में चुप हैं। प्रबंधक समिति का कहना है कि बिना वर्कलोड के कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। जिन्हें भुगतान के लिए संस्था के पास फंड नहीं है। इसीलिए इन कर्मचारियों को हटाया गया है।
गत 12 अप्रैल को राष्ट्रीय विद्या समिति की ओर से जारी आदेश में 127 कर्मचारियों के ऑर्डर पर हस्ताक्षर करवाए गए। इसमें उन्हें संस्था से अभी हटाने की बात गई गई है। बताया जा रहा है कि प्रशासक द्वारा की गई नियुक्तियां प्रबंधक समिति के निशाने पर रहीं। वहीं जब यहां प्रशासक नियुक्त था तो उस समय पावर से बाहर समिति के अग्रणी लोगों के निशाने पर रहे कुछ अधिकारी अपनी सीट बचाने में सफल रहे। इसके अलावा तीन साल में नियुक्त सभी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
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कुछ कर्मचारियों को थी वेतन बढ़ने की उम्मीद, लेकिन रोजगार ही छीन लिया गया
हटाए गए कुछ कर्मचारियों में कुछ तो प्रशासक की नियुक्ति से पहले से ही कार्यरत थे। इन्हें उम्मीद थी कि प्रशासक के जाने के बाद नई प्रबंधक समिति आएगी और शहर के अपने लोगों से वेतन तक बढ़ाए जाने की उम्मीद पाले बैठे थे। लेकिन उनका रोजगार ही छीन लिया गया। एक कर्मचारी के घर से तो उनकी बेटी व वे खुद घर बैठ गए।

बिना जरूरत के केवल सिफारिशी आधार पर की गई थी कई भर्तियां
बताया जा रहा है कि अधिकतर नियुक्तियां भाई-भतीजावाद, सिफारिशों के कारण व बिना वर्कलोड के ही कर दी गई थीं। इस कारण संस्था के पास इन्हें देने के लिए वेतन नहीं है। चुनाव के समय से ही इन नियुक्तियों को रद्द करने की बातें उठ रही थीं।
संस्था में नवचयनित कई कॉलेजियम सदस्यों ने इस फैसले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। वहीं एक सदस्य ने कहा कि वे अपने साथियों से विचार-विमर्श कर रहे हैं। इस बारे में जल्द खुलासा करेंगे। वहीं कई कॉलेजियम सदस्य इसीलिए भी चुप बताए जा रहे हैं कि उन्हें सांध्यकालीन, बीएड, फार्मेसी व स्कूल की प्रधानगी मिलने की उम्मीद है।
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पिछले तीन साल में संस्था में बिना वर्कलोड के नियुक्तियां कर दी गई थीं। इससे संस्था पर लाखों रुपये के बजट का बोझ पड़ रहा है। वर्कलोड को देखते हुए संस्थाओं से 104 टीचिंग व 23 नॉन टीचिंग कर्मचारियों को तीन माह के लिए डिसकंटीन्यू किया है। तीन माह बाद वर्कलोड के हिसाब से कर्मचारियों को वापस लिया जाएगा। इसके अलावा स्कूल में भी बिना जरूरत के 20 से ज्यादा भर्तियां की गई हैं। उनका वर्कलोड बनवाया जा रहा है। बिना किसी भाई-भतीजावाद या सिफारिश के संस्था हित में अनावश्यक कर्मचारियों को डिस्कंटीन्यू किया गया है। इसमें पूरी पारदर्शिता बरती गई है।
-साकेत मंगल, अध्यक्ष, आरवीएस, कैथल।
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