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कपास की फसल बचाने के लिए दिए टिप्स

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कपास की फसल बचाने के लिए दिए टिप्स
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अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। कपास की फसल में समेकित कीट प्रबंधन के तहत कृषि विभाग द्वारा गांव भालंग में कपास की फसल पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि अधिकारी डा. जगबीर लांबा ने किसानों का मार्गदर्शन करते हुए रस चूसक कीटों की पहचान व उनके नियंत्रण के बारे में बताया।
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उन्होंने कहा कि कपास की फसल में लगने वाले रस चूसक कीटों में सफेद मक्खी सबसे अधिक हानिकारक है। पिछले कुछ वर्षों में कपास में सफेद मक्खी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। किसान भाई अपने खेत का लगातार निरीक्षण करें। एक पौधे के ऊपर, मध्य व नीचे से पत्ते लें तथा उन पर देखें की कितने रसचूसक कीट लगे हैं। एक एकड़ में कम से कम दस पौधों का निरीक्षण करें। एक पत्ते पर यदि सफेद मक्खी के 4 से 6 वयस्क मिलें तो बिना देरी के अपनी फसल पर कीटनाशक दवा का स्प्रे करें। उन्होंने कहा कि फ्लोनिकामिड 80 ग्राम प्रति एकड़, या फिर स्पाईरोमेसिफिन 200 एमएल प्रति एकड़ दवा का 200 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें। यदि पत्तों पर 8 से अधिक सफेद मक्खी के वयस्क मिलें तो उस अवस्था में डाईफेन्थाईयूरान नामक दवा 200 एमएल दो सो लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें। उन्होंने कहा कि कीटनाशक के स्प्रे के दौरान खेत में नमी की भरपूर मात्रा का होना आवश्यक है। इस मौके पर मौजूद किसान सुरेंद्र, दर्शन, सतपाल, महावीर, वेदप्रकाश किसानों के प्रश्नों के जवाब दिए।
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