दुकानें बंद कर जीएसटी के विरोध में सड़क पर उतरे कपड़ा व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जीएसटी में कपड़े पर 5 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान किए जाने के विरोध में वीरवार को कपड़ा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद करके सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। जिससे जिले की होलसेल मार्केट बंद रही। कैथल सहित आसपास के शहरों में सप्लाई होने वाले कपड़े का कारोबार ठप्प रहा। कपड़ा व्यापारियों ने शहर में प्रदर्शन करते हुए डीसी के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा और उसमें सरकार से कपड़े पर लगाए गए 5 प्रतिशत टैक्स को वापिस लेने की मांग की।
वीरवार सुबह ही कपड़ा व्यापारी एसोसिएशन सदस्य अपनी दुकानों पर पहुंच कर दुकान खोलने की बजाए भगत सिंह चौक के निकट स्थित जनता मार्केट में एकत्रित हुए। जहां से वह नारेबाजी करते हुए तलाई बाजार, मेन बाजार, कमेटी चौक व पिहोवा चौक से लघु सचिवालय पहुंचे। जहां भी कपड़ा की दुकानें थीं, वह बंद रहीं। प्रदर्शन का नेतृत्व कपड़ा व्यापारी एसोसिएशन के जिला प्रधान रमेश डेमला ने किया।
रमेश डेमला ने कहा कि देश की आजादी से पूर्व महात्मा गांधी ने स्वयं सूत को कातकर कपड़ा बनाया, उस समय से लेकर अब तक कपड़े का व्यापार सभी करों से मुक्त था, लेकिन अब सरकार ने कपड़े के व्यापार पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाकर व्यापारियों के साथ अन्याय किया है। इससे व्यापारियों की परेशानी तो बढ़ेगी ही साथ में आम जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि आज देशभर के व्यापारियों ने जीएसटी के विरोध में दुकानें बंद करके धरने प्रदर्शन किए है। साथ ही यह भी बताया कि जीएसटी के विरोध में 28 जून को देशभर के व्यापारी दिल्ली में इकट्ठे होकर प्रदर्शन करते और कपड़ा मंत्री से मिलकर इसके विरोध में बातचीत करेंगे।
एक दिन में होता है 50 लाख का व्यापार
कैथल में होलसेल कपड़ा मार्केट काफी बड़ी है। विक्रेताओं से मिली जानकारी के अनुसार शहर में कुल 500 के करीब दुकानेें है। जिसमें लगभग 50 लाख रुपये का रोजाना कारोबार होता है।
बंद रही दुकानें,भटकते रहे ग्राहक
प्रदर्शन के दौरान सभी व्यापारियों ने हड़ताल कर अपनी दुकानों को बंद रखी। जिस कारण कपड़ा खरीदने वाले ग्राहक ईधर उधर भटके। जिससे उन्हें काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा और उन्हें खरीददारी किए बिना ही वापिस लौटना पड़ा। पूरे शहर में सभी दुकानें बद रही।
लगेगा पांच प्रतिशत टैक्स, बढ़ेगी कागजी कारवाई
व्यापारियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि पहले सरकार कपड़े पर कोई टैक्स नहीं लगाती थी। दुकानदार बक्षीश गिरधर ने कहा कि जीएसटी के लागू होने के बाद कपड़ा व्यापारियों पर पांच प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा। इसके साथ ही कागजी कार्रवाई भी बढ़ेगी। जिस कारण व्यापारियों की परेशानी कम होने की बजाय और अधिक बढ़ जाएगी।
टैक्स देने के लिए तैयार
कपड़ा व्यापारी विनोद कुमार ने बताया कि व्यापारी सरकार को टैक्स देने के लिए बिलकुल तैयार है। उसने बताया यदि जीएसटी कपड़ा व्यापार पर लागू होगा तो व्यापारियों को वर्ष में 36 बार रिटर्न भरना होगा। इसके लिए कागजी कारवाई भी बढ़ जाएगी। जिस कारण व्यापारियों को काफी परेशानी उठानी होगी। कागजी कारवाई बढ़ने के बाद वह ठीक ढंग से दुकानदारी नहीं कर पाएंगे। उन्हें रिटर्न भरने के लिए एक अलग से अकांउटेंट रखना होगा। काफी दिक्कतें होगी।
सरकार फैसले को तुरंत ले वापिस
कपड़ा व्यापारी ओमप्रकाश ने कहा कि आजादी के समय में सरकार ने रोटी, कपड़ा और मकान देने में राहत की बात की थी। पहले की सरकारों ने कभी भी इस पर टैक्स नहीं लगाया है। लेकिन कें द्र की भाजपा सरकार ने जीएसटी को लागू करने के फैसले के बाद सभी व्यापारियों में भय का माहौल बना दिया है। सरकार को इस फैसले को तुरंत वापिस लेना चाहिए। जिससे व्यापारियों को राहत मिल सके।
प्रदर्शन में भगवान दास, कृष्ण लाल, रामलाल, हरिचंद, जगदीश, लक्ष्मीनारायण, सतपाल, हंसराज, नीरज व केसरदास सहित शहर के अन्य कपड़ा व्यापारी मौजूद रहे।