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ेलवे स्टेशन पर टिकट की एक ही खिड़की से यात्रियों को परेशानी

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रेलवे स्टेशन पर टिकट की एक ही खिड़की से यात्रियों को परेशानी
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1870 में अंग्रेजों के जमाने में बना रेलवे स्टेशन बदहाली की कगार पर
न शौचालय न वेटिंग रूम की मिलती है कोई सुविधा
फोटो नंबर-23 व 24
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन पर टिकट की एक ही खिड़की होने से यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बड़े स्टेशन पर भी एक ही टिकट खिड़की होने से यात्रियों को कई बार टिकट नहीं मिल पाती है। जिससे उन्हें बेटिकट ही ट्रेन में सवार होकर अपने गंतव्य पर जाना पड़ता है।
यात्री रवि, अनिल, अभिषेक, ऋषभ ने बताया कि टिकट न मिलने की सबसे अधिक समस्या सुबह के समय होती है। सुबह के समय दो ट्रेनों की आवाजाही होती है। लेकिन यहां पर कई बार तो ट्रेन आने से पहले केवल 10 से 15 मिनट तक ही टिकट मिलनी शुरू होती है। जिससे काफी परेशानी होती है।
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1870 में अंग्रेजों के जमाने में बना रेलवे स्टेशन बदहाली की कगार पर : बता दें कि कैथल का बड़ा रेलवे स्टेशन आजादी के समय से भी पहले ही निर्मित है। यह स्टेशन 1870 में अंग्रेजों के जमाने में बना था। जो वर्तमान में बदहाली के कगार पर है। यहां पर मूलभूत सुविधाओं का भी टोटा है। पीने की समस्या से लेकर शौचालय भी बदहाल हैं। इसके साथ ही वेटिंग रूम पर भी हमेशा ताला लटका रहता है। जिस कारण रात के समय में यात्रियों का ठहराव नहीं हो पाता है।
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समय के मुताबिक खिड़की खुली रहती : स्टेशन मास्टर रणधीर सिंह ने बताया कि स्टेशन पर टिकट को लेकर कोई भी लापरवाही नहीं बरती जाती है। नियमों के मुताबिक ट्रेन के आने से चंद मिनट पहले ही टिकट की खिड़की को बंद करना होता है। लेकिन यहां पर लोगों को उचित सुविधा देने के लिए ट्रेन के आने तक खिड़की खुली रहती है। ताकि जनता को किसी प्रकार की कोई परेशानी हो।
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