फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गांवों को मिले पढ़े लिखे सरपंच तो आया समाज में बदलाव

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
कमल कुमार
कैथल। पढ़ी लिखी पंचायतें जिले में नई इबारतें लिख रही हैं। किसी गांव में शराब बंदी तो कहीं खुले में शौच मुक्ति की दिशा में पंचायतों का उल्लेखनीय काम है। छह गांव ऐसे है जिन्होंने शराबबंदी, बेटियों को पढ़ाने, पानी को बचाने व खुले में शौच मुक्त करवाने की दिशा में कार्य किया है। पंचायतों द्वारा इस दिशा में किए जा रहे कार्यों के बाद से गांवों में लोगों में सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के प्रति जागरूकता भी आई है।

फर्शमाजरा
महिलाओं के विरोध से शराबबंदी, 11 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान
गांव फर्शमाजरा में करीब एक साल पहले अपने पतियों द्वारा शराब पीने के बाद किये जाने वाले झगड़ों से तंग आ चुकी महिलाओं ने गांव में स्थित ठेके का विरोध किया। जिस पर गांव की महिला सरपंच सिमरनजीत ने महिलाओं के समर्थन में आकर नवंबर 2016 में आयोजित ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करके शराब का ठेका बंद कराया और शराब का ठेका चलाने वाले पर 11 हजार रुपये का प्रावधान किया। जिसके बाद तीन एफआईआर दर्ज की गई व एक पर 11 हजार रुपये का जुर्माना किया गया। इसके बाद से गांव में सुबह की शराब पीने वाले लोगों में काफी सुधार हुआ और उन्होंने शराब पीना काफी कम किया। इसके बाद से गांव में शराब बिकनी बंद हुई। सरपंच सिमरनजीत ने कहा कि गांव के ठेके पर लगने वाली भीड़ के बाद जब महिलाओं की इस पीड़ा को समझा तो यह फैसला लिया।
विज्ञापन


पहाड़पुर में बेटियों को किया जाता है प्रोत्साहित, अब तक 75 को किया सम्मानित
गांव की बेटियों को उच्च शिक्षा काफी कम लोगों द्वारा दिलवाई जाती थी। जिस पर महिला सरपंच कोमल ने शिक्षा के महत्व को समझते हुए बेटियों को अच्छी शिक्षा मिले इस ओर ध्यान देकर पहली ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करके अव्वल रहने वाली बेटियों को 1100 रुपये देने का प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद दूसरी ग्राम सभा में बेटी के जन्म व विवाह पर 2100 रुपये देने के प्रस्ताव पारित किया। सरपंच कोमल ने बताया कि वह इन दोनों प्रस्ताव के बाद से 15 बेटियों को उनके जन्म, 30 बेटियों की शादी पर व 20 बेटियों को शिक्षा में अव्वल रहने पर सम्मानित कर चुके हैं।

रामदासपुरा कर रहा पानी बचाने का कार्य
गांव रामदासपुरा ने जल ही जीवन को अपना ध्येय समझ इस दिशा में कार्य किया है। जिसके बाद से इस गांव के लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक किया गया तो उन्होंने इसके प्रति अपना कर्तव्य समझ कार्य किया। जिसके तहत रोजाना 3600 लीटर पानी की बचत की जाती है। सरपंच सतनाम सिंह ने बताया कि पानी को बचाने के लिए सभी ग्रामीण सहयोग कर रहे हैं।

जिला की तीन पंचायतें खुले में शौच मुक्त के लिए कर रही कार्य
जिला की तीन ग्राम पंचायतें स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त के लिए कार्य कर रही है। जिसके तहत गोबिंदपुरा में 70 सुलभ शौचालय बनाने का उद्देश्य व गांव चौशाला व खानपुर में खुले में शौच जाने वाले पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। गांव गोबिंदपुरा के सरपंच गज्जन सिंह ने बताया कि खुले में शौच मुक्ति को लेकर नंवबर 2017 में ग्राम सभा में 70 सुलभ शौचालय बनाने का प्रस्ताव पारित किया जिसमें से दो महीने में 15 सुलभ शौचालय का निर्माण किया गया। इसी प्रकार से गांव खानपुर में भी खुले में शौच जाने वाले ग्रामीण पर 500 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। जिसके बाद से ग्रामीण जागरूक हुए हैं। सरपंच रामनाथ ने बताया कि उन्होंने सरपंच बनने के बाद सबसे पहले यह फैसला लिया ताकि उसका गांव स्वच्छ बन सके।
विज्ञापन


किया जुर्माना तो खुले में शौच मुक्त हो गया गांव : गांव चौशाला को खुले में शौच मुक्त गांव बनाने के लिए ग्राम पंचायत द्वारा उठाए गए कदमों के बाद प्रभावी परिणाम आए। जिसके बाद गांव इस समय पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त गांव बना। ग्राम सरपंच बलदेव सिंह ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत ने खुले में शौच पर अंकुश लगाने के लिए 500 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया।


गांवों को मिले पढ़े लिखे सरपंच तो आया समाज में बदलाव
गांव फर्शमाजरा में शराबबंदी, पहाड़पुर में बेटियों को किया जाता है प्रोत्साहित
रामदासपुरा कर रहा पानी बचाने का कार्य तो कलायत के गांव चौशाला में खुले में शौच करने पर किया जाता है जुर्माना
फोटो नंबर-5 से 10
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें