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लापता हुए और लापता ही रह गए

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राजू जगत
कैथल। जिले के लापता हुए लोगों का परिजन आज भी इंतजार कर रहे हैं कि वे कब उनके घर का दरवाजा खटखटाएंगे और उनके घर की खुशियां फिर से लौट आएं। जिले में पिछले पांच साल में 189 लोगों का कुछ पता नहीं है कि वे कहां है और किस हाल में रह रहे हैं या फिर हैं भी की नहीं। परिजनों को उम्मीद है कि उनका बेटा, भाई, पिता, चाचा वापस घर आएंगे। जिले में पिछले पांच साल में 922 लोग लापता हुए हैं। जिसमें 189 लोग लापता ही रह गए हैं।
इस प्रकार बढ़ रही है लापता होने वाले लोगों की संख्या : वर्ष 2013 में जहां 110 लोग लापता हुए थे। जिसमें पुलिस ने 99 लोगों का पता लगा लिया था। जिसमें 11 लोगों का अभी तक कुछ पता नहीं है। वर्ष 2014 में 164 लोग जिले लापता हुए जिसमें 132 लोगों को पुलिस ने ढूंढ लिया था। लेकिन 32 लोगों का आज तक पता नही हैं। वर्ष 2015 में 186 लोग लापता हुए थे जिसमें से पुलिस ने 148 लोगों को ढूंढ लिया था और 38 लोगों का अभी तक कुछ पता नहीं है। वर्ष 2016 में कुल 246 लोग लापता हुए, जिसमें से 38 आज भी लापता हैं। वर्ष 2017 में 218 लोग लापता हुए है। जिसमें से 148 लोगों का पुलिस ने पता कर लिया है लेकिन 70 लोग अभी तक लापता हैं।
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लापता हुए लोगों में किसी का बेटा, किसी का पति तो किसी की बेटी और किसी की मां हैं। हर घर में इंतजार है कि खत्म नहीं हो रहा।
अब भी पिता के घर आने का कर रहे हैं इंतजार : गांव करोड़ा निवासी ईश्वर सिंह गांव से ही करीब डेढ़ साल पहले लापता हुआ था। उसके बेटे शैंकी ने बताया कि कुछ लोगों ने उसके पिता को घर से 100 मीटर दूरी पर देखा था। लेकिन उसके बाद से उसके पिता का कुछ पता नहीं है। शैंकी ने बताया कि वह डेढ़ साल से इसी उम्मीद में है कि कब उसके पिता उनकी घर के चौखट पर आएंगे। पिता की कमी बहुत खल रही है। सब्र भी नहीं आ रहा है कि वे कहां हैं और किस हाल में हैं।
एक साल से पापा इंतजार कर रहे है छोटे-छोटे बच्चे व पत्नी : डीएवी कॉलोनी निवासी ईश्वर सिंह ने बताया कि एक साल पहले उसका 35 वर्षीय भाई बलवंत सिंह डेरा सच्चा सौदा सिरसा में गया था। जिसमें नरवाना आने के बाद उसने किसी के फोन से फोन किया था कि वह घर वापस आ रहा है। लेकिन उसके बाद उनसे कोई बात नहीं हुई है। उसके भाई के पास एक 13 वर्षीय बेटा नवीन, एक प्रवीन व एक बेटी है। उसके बच्चे व पत्नी ज्ञानो देवी अपने पति का इंतजार कर रही है कि वो कब वापस लौट कर आएंगे। उसके घर में खुशियां खत्म हो गई हैं। केवल बलवंत के आने की आहट महसूस करना चाहते हैं।
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एसपी आस्था मोदी ने बताया कि एफआईआर होने के ऑन लाइन लापता व्यक्ति व बच्चेे की फोटो भेजी जाती है। ताकि दूसरी स्टेट व जिलों में अगर पुलिस व अन्य संस्थाओं को जानकारी मिले तो उसकी पहचान हो सके। इसके अलावा बच्चों के लापता होने के गंभीर मामलों में स्टेट क्राइम को भी मामला भेज दिया जाता है। जो लोग अभी तक नहीं मिले हैं पुलिस उनको ट्रेस करने की प्रयास कर रही है।


लापता हुए और लापता ही रह गए
परिजन आज भी कर रहे हैं इंतजार कि..कभी आज दरवाजा ना खटखटा दें
जिले में प्रतिवर्ष बढ़ रहे है लापता लोगों की संख्या
जिले में 922 हुए लापता, 189 का आज तक नहीं चला पता.
फोटो नंबर- 37
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